इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। प्यार को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह दिल से होता है। लेकिन साइकोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के डॉक्टर और प्रोफेसर मानते हैं कि प्यार दिमाग से होता है और यह 0.2 सेकंड के बेहद छोटे से समय अंतराल में हो सकता है। इसके पीछे कुछ हार्मोन का रोल होता है। जब कोई अच्छा लगता है तो इन हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन, एड्रेनलिन और वेसोप्रेसीन ऐसे हार्मोन होते हैं जो प्यार के उत्साह को बढ़ाने का काम करते हैं।

केमिकल के कारण बदलती हैं भावनाएं

मनोचिकित्सक डॉ. वीएस पाल का कहना है शरीर में मौजूद केमिकल भावनाओं को बढ़ाने और कम करने का काम करते हैं। किसी को देखने और सुनने के बाद दिमाग में सिग्नल पहुंचते हैं, तो कुछ ही सेकंड में केमिकल काम करने लग जाते हैं। प्यार के मामलों में एक हद तक नियंत्रण रखा जाए तो बेहतर है, नहीं तो इससे काम डिस्टर्ब हो सकता है या व्यक्ति डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं। जब तक प्यार रहता है तब तक खुशी का अनुभव होता है, लेकिन जिन लोगों के ब्रेकअप हो जाते हैं वे डिप्रेशन में चले जाते हैं।

कई बार दिमाग पर लीड करने लगते हैं हार्मोन

मनोचिकिस्तक डॉ. भास्कर प्रसाद का कहना है कि प्यार होने में पूरी तरह से हार्मोन की भूमिका होती है। इनका स्राव होने से कई बार यह दिमाग पर भी लीड करने लगते हैं। इसमें कहीं न कहीं बॉडी की जरूरतें भी शामिल होती है। दिमाग और हार्मोन की गतिविधियों के कारण प्यार होता है। एड्रेनलिन हार्मोन का स्राव वैसे तो खतरा पैदा होने पर होता है। यह तनाव होने पर रिलीज होता है, लेकिन जब किसी से प्यार होता है तो यह सक्रिय हो जाता है। इसमें हथेलियों पर पसीना आने लगता है तो कभी होठ सूखने लगते हैं और दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है।

ऑक्सीटोसीन से होती है केयरिंग की इच्छा

प्यार में एक दूसरे से मिलने की इच्छा डोपामाइन हार्मोन के कारण होता है। यह दिमाग से नियंत्रित होता है। किसी की केयर करने की इच्छा ऑक्सीटोसीन हार्मोन के स्राव से होती है। जीवनभर साथ रहने की इच्छा वेसोप्रेसीन हार्मोन के कारण होती है। एसजीएसआईटीएस के केमिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. नितिन सप्रे का कहना है कि प्यार केमिस्ट्री से शुरू होता है और इसमें इमोशंस और केयर का मैथेमेटिक्स भी काम करता है।

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