इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपित श्वेता विजय जैन निकली। वह अफसर और नेताओं से दोस्ती गांठकर आरती से दोस्ती करवा देती थी। आरती उन्हें जाल में फंसा कर वीडियो बना लेती थी। फिर श्वेता के इशारे पर रुपए वसूलने का काम होता था। इंजीनियर हरभजन के लिए भी इसी तरह जाल बिछाया गया था। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र के मुताबिक आरती दयाल उर्फ आरती सिंह उर्फ ज्योत्सना ने पूछताछ में बताया कि गिरोह की मुखिया श्वेता विजय जैन है। उसकी हरभजनसिंह से करीब 10 साल पुरानी दोस्ती है। हरभजन सिंह से उसके संबंध थे। इसके बदले भाई राजा के लिए ठेके और टेंडर लेती थी। श्वेता ने हरभजन के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली और साजिश के तहत आरती से मुलाकात करवा दी। आरती ने हरभजन से मोबाइल नंबर ले लिए और बातचीत शुरू कर दी। श्वेता को दोनों की नजदीकी का पता था, लेकिन आरती ने हरभजन को बताया कि दोस्ती के बारे में श्वेता को जानकारी नहीं मिलनी चाहिए।

हरभजन भी ठेके दिलाने का वादा कर संबंध बनाते रहे। वीडियो बनने के बाद आरती ने श्वेता को बताया। योजना के मुताबिक आरती ने हरभजन को कॉल कर 3 करोड़ रुपए मांगे। हरभजन को भोपाल बुलाया। हरभजन ने उससे कहा कि उसके पास 3 करोड़ रुपए नहीं हैं। आरती बैठक से बाहर निकली और श्वेता को कॉल कर कहा कि वह रकम कम करने की गुहार लगा रहे हैं। श्वेता ने कहा 2 करोड़ से कम मत मांगना। आरती ने हरभजन को 2 करोड़ रुपए देने का कहा और बैठक से रवाना हो गई। घटनाक्रम में अंत तक हरभजन यही सोचते रहे कि श्वेता शामिल नहीं है। उन्होंने रिपोर्ट में भी आरती-मोनिका का नाम लिखवाया।

पूर्व मंत्री के फोन की रिकॉर्डिंग में हरभजन से रुपए मांगने की जानकारी मिली

एसटीआई प्रमुख संजीव शमी को सोमवार रात मुख्यमंत्री ने चर्चा के लिए बुलाया। उनके साथ डीजीपी वीके सिंह भी थे। सूत्रों के मुताबिक शमी ने हनीट्रैप कांड की 20 पन्नाों की रिपोर्ट तैयार की है। इसमें भाजपा और कांग्रेस नेताओं व अफसरों के शामिल होने का जिक्र है। सूत्रों के मुताबिक अफसरों ने यह भी बताया कि एजेंसी करीब तीन महीने से पूर्व मंत्री का फोन रिकॉर्ड कर रही थी। पूर्व मंत्री के फोन पर हरभजन भी कॉल करता था। शक होने पर हरभजन का फोन रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। इसमें आरती द्वारा रुपए मांगने की जानकारी मिली। आरती का फोन रिकॉर्ड किया तो भंडा फूट गया।

आरती-बरखा के आरोपों से घबराए अफसर, बोलने पर पाबंदी

एसआईटी द्वारा की जा रही कार्रवाई को गोपनीय रखा जा रहा है। जांच में शामिल अफसरों के फोन की भी निगरानी होने लगी है। आरती और बरखा ने एमवाय अस्पताल में मेडिकल के दौरान मीडिया के सामने पुलिस की प्रणाली पर सवाल उठाए थे। बड़े लोगों पर साजिश में शामिल होने का आरोप भी लगाया था। खबरें सामने आने के बाद अफसरों ने फटकार लगाई और गोपनीयता बढ़ा दी। मीडिया से चर्चा करने पर भी पाबंदी लगा दी।

Posted By: Prashant Pandey

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