Madhya Pradesh Ranji Champion: इंदौर। यह बहुत बड़ी उपलबि्ध है। यह खिताब हर खिलाड़ी, काेच और सपाेर्ट स्टाफ का सपना था। यह मेरा सपना था, मेरी पीढ़ी के हर क्रिकेटर का सपना था कि मप्र टीम रणजी ट्राफी जीते। टीम भावना ने कमाल कर दिखाया। काेच चंद्रकांत पंडित दाे साल में मप्र का क्रिकेट ही बदल दिया है। मैं अपने जीवन में पहली बार देख रहा हूं कि मध्य प्रदेश में बैंच स्ट्रैंथ इतनी मजबूत हुई है। टीम के कई खिलाड़ी चाेटिल थे, लेकिन काेई फर्क नहीं पड़ा।

यह कहना है भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सचिव संजय जगदाले का। उन्‍होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम इसलिए सफल है क्याेंकि टीम की बैंच स्ट्रैंथ मजबूत है। यही सि्थति मप्र की भी है। यहां हर जगह के लिए विकल्प माैजूद हैं। इसके लिए पंडित काे श्रेय जाता है। पंडित ने मप्र में टीम चयन के तरीके काे बदल दिया। अब तक आंकड़ाें के आधार पर खिलाडि़याें का चयन हाेता था।

जगदाले के अनुसार सभी जगह चयनकर्ता खिलाडि़याें के प्रदर्शन का मूल्यांकन निचले टूर्नामेंट के आंकड़ाें के आधार पर करते हैं। पंडित ने यह व्यवस्था बदली। उन्हाेंने वर्तमान के साथ ही भविष्य की जरूरताें पर ध्यान दिया। उन्हाेंने इस बात पर जाेर दिया कि टीम की जरूरत क्या है। बहुत लाेगाें ने इसका विराेध भी किया। यह वही लाेग थे जाे वर्तमान दाैर के क्रिकेट से जुड़े नहीं थे। कुछ के निजी हित भी थे। मगर पंडित ने कभी आलाेचना का जवाब नहीं दिया। आज उनका काम आलाेचकाें काे जवाब दे रहा है।

जगदाले ने कहा कि पंडित की यह खूबी है कि वे खिलाडि़याें काे समर्थन करते हैं। वे खिलाड़‍ियाें काे बताते हैं कि टीम काे उनसे क्या अपेक्षा है। खिलाड़ी काे भराेसा दिलाते हैं कि असफल हुआ ताे टीम से बाहर नहीं हाेगा। बहुत जगह ऐसा भी हाेता है कि खिलाड़ी के असफल हाेने का इंतजार किया जाता है, ताकि उसे बाहर कर अपने पसंदीदा काे प्रवेश दिलाया जा सके। मगर पंडित ने ऐसा नहीं हाेने दिया। उन्हाेंने याेग्य खिलाड़ी के साथ न्याय किया। वे असफलता की जबावदारी खुद लेते हैं जबकि सफलता का श्रेय टीम के खिलाड़‍ियाें काे देते हैं। पंडित ने मध्य प्रदेश की पूरी क्रिकेट संस्कृति काे बदल दिया है।

जगदाले के अनुसार टीम की सफलता में कप्तान का भी अहम याेगदान हाेता है। हमारे पास आदित्य श्रीवास्तव जैसा कप्तान है। वर्ष 2007 में जब मैं राष्ट्रीय चयनकर्ता था ताे हमने महेंद्र सिंह धाैनी काे विश्व कप के लिए पहली बार कप्तान बनाया था। मैं उस समय टीम के साथ था। मैंने धाैनी से कहा कि एमएस हमने युवा टीम चुनी है ताे धाैनी ने आत्मविश्वास से जवाब दिया था कि हम ट्राफी लेकर लाैटेंगे। इसी तरह जब आदित्य से इस सत्र में मैंने चर्चा की ताे वे बाेले, सर हम इस बार ट्राफी जीतेंगे। पंडित ने पूरी टीम में आत्मविश्वास भरा है। यही खिलाड़ी पहले भी थे। मगर तब टीम लीग मैचाें में ताे अच्छा खेलती थी, लेकिन जैसे ही नाकआउट में पहुंचते थे ताे टीम बिखर जाती थी। हार का डर टीम पर हावी हाे जाता था। अब हम दबाव में नहीं आते। यह सत्र मप्र के लिए स्वर्णिम रहा है। हमारे दाे खिलाड़ी भारतीय टीम तक पहुंचे हैं। टीम चैंपियन बनी है। मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले सालाें में भी यह क्रम चलता रहे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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