इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हर साल सितंबर के अंत तक प्रदेश से विदा लेने वाला मानसून अभी मध्यप्रदेश का मेहमान बना रहेगा। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक इसकी मेहरबानी बरकरार रहने की उम्मीद है। मानसून की विदाई 30 सितंबर को मानी जाती है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस बार 10 से ज्यादा सिस्टम बने जिनकी वजह से सतत बारिश होती रही। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिलसिला आने वाले दो-तीन दिन बना रहेगा। इसके बाद धीरे-धीरे सिस्टम कमजोर होगा। हालांकि इसके बाद भी छिटपुट बारिश होती रहेगी।

मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 25 जिलों में इस साल अब तक 45 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इस वजह से इस साल प्रदेश में बारिश का औसत आंकड़ा 46 इंच पहुंच चुका है। यह सामान्य से 33 प्रतिशत ज्यादा है। मंदसौर जिले में 76 इंच बारिश :मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश मंदसौर जिले में हुई है।

यहां आंकड़ा करीब 76 इंच पहुंच चुका है। दूसरे नंबर पर होशंगाबाद (71) और तीसरे नंबर पर रायसेन (68.27) जिला है। बारिश भले ही पूरे प्रदेश में कहर बरपाती दिख रही हो, लेकिन सात जिले ऐसे भी हैं जहां बारिश ने अब तक 30 इंच का आंकड़ा भी नहीं छुआ। सबसे कम बारिश दतिया जिले में दर्ज हुई है। 15 सितंबर तक यहां महज 24 इंच बारिश दर्ज हुई है।

इस साल जिस तरह से सिस्टम बन रहा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि प्रदेश से मानसून की रवानगी अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में ही होगी। राजस्थान-गुजरात से सटे इलाकों में आने वाले कुछ दिनों और झमाझम होगी, जबकि पश्चिम मप्र के बाकी क्षेत्रों में सिस्टम कमजोर हो जाएगा। - अजय शुक्ला मौसम वैज्ञानिक

सट्टा बाजार के दावे के करीब

मानसून की शुरुआत से पहले ही सट्टा बाजार ने इंदौर में इस साल बारिश का आंकड़ा 48 इंच को छूने की भविष्यवाणी की थी। हालांकि जिस तरह से मानसून की शुरुआत हुई थी उससे यह मुश्किल लग रहा था। मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार शाम तक शहर में बारिश 46 इंच पार कर चुकी थी। मानसून की रवानगी फिलहाल दूर है। ऐसे में सट्टा बाजार का अनुमान सही साबित होता नजर आ रहा है।