इंदौर/देवास, नईदुनिया प्रतिनिधि। मैग्निफिसेंट मध्यप्रदेश से पहले ही देवास के लिए अच्छी खबर है कि यहां आने वाले दो-तीन साल में कुछ बड़ी इंडस्ट्री 1200 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश करने का फैसला कर चुकी हैं। इसके अलावा जनप्रतिनिधि और अफसरों ने मिलकर देवास में तीन सौ हेक्टेयर लैंड बैंक भी बना ली, ताकि किसी भी बड़े उद्योगों को यहां आने में दिक्कत न हो। देवास जिले के चापड़ा, खातेगांव, पीपलरावां में भी पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। मालवा-निमाड़ में औद्योगिक दृष्टि से देवास, पीथमपुर, निमरानी अन्य किसी शहर से बेहद सुलभ हैं। यहां रेलवे कनेक्टिविटी, पानी, एजुकेशन, होटल, सड़क सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। किसी भी उद्योग के साथ आने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए रहने की भी पर्याप्त सुविधाएं हैं।

ऐसे में उद्योगपतियों के लिए देवास बेहतर जगह मानी जाती है। हालांकि कुछ साल पहले तक यहां बड़ी इकाई के लिए जमीन की कमी महसूस की जाने लगी थी। इसके लिए जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने मिलकर लैंड बैंक बनाने की योजना बनाई। इसके तहत सबसे पहले औद्योगिक क्षेत्र की उन जमीनों की तलाश की गई, जो अनुपयोगी है। कुछ उद्योगपतियों ने जमीन तो आवंटित करवा ली थी, लेकिन उद्योग शुरू नहीं किया था, उनसे जमीन वापस ली गई। कुछ उद्योगों के आसपास जरूरत से ज्यादा जमीन थी, वह भी वापस ले ली गई। इसके अलावा शहर की दस कि लोमीटर की परिधि में सरकारी जमीन चिन्हित की गई।

कुल मिलाकर लगभग 300 हेक्टेयर जमीन प्रशासन की नजर में आ चुकी है। इसमें कुछ जमीन उद्योगों को दिए जाने के लिए तैयार है तो कुछ की प्रक्रिया चल रही है। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री देवास के अध्यक्ष अशोक खंडेलिया ने बताया कि इप्का, आयशर, ग्रेबिएल, विप्पी साल्वेंट के अलावा कुछ अन्य इंडस्ट्री देवास में अपना विस्तार कर रही है। इसमें आने वाले दो-तीन साल में 1200 करोड़ रुपए निवेश कि या जाएगा।

ऑनलाइन देंगे जमीन

शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी ने बताया कि देवास में अभी विकास की काफी संभावनाएं है। इसी वजह से हमने लैंड बैंक तैयार कि या है। इसमें हम 'पहले आओ, पहले पाओ' की तर्ज पर जमीन ऑनलाइन देंगे। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजकुमार तिवारी ने बताया कि चापड़ा, खातेगांव, पीपलरावां सहित अन्य जगह पर चार सौ हेक्टेयर से अधिक जमीन उद्योगों के लिए उपलब्ध है। कलेक्टर डॉ. श्रीकांत पांडेय ने बताया कि उद्योगों के लिए दस कि लोमीटर के रेडियस में जमीन चिन्हित की गई है।

Posted By: Prashant Pandey