इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Maha Shivaratri 2020 ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी महेश्वर से करीब 13 किलोमीटर दूर चोली गांव में गौरी सोमनाथ का विशाल मंदिर है। परमारकालीन इस मंदिर में भूरे पत्थर से बना करीब आठ फीट ऊंचा शिवलिंग है। करीब सात साल पहले पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को राज्य संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया है। महाशिवरात्रि पर यहां आसपास के कई श्रद्धालु पूजा-अभिषेक के लिए आते हैं।

खुदाई में काले पत्थर पर उकेरी गई अर्द्धनिर्मित नंदी की मूर्ति भी मिली थी

पुरातत्व विभाग ने 1985 में आसपास की भूमि का सर्वे किया था, तब खुदाई में काले पत्थर पर उकेरी गई अर्द्धनिर्मित नंदी की मूर्ति भी मिली थी। विभाग के मुताबिक यह परमारकालीन मंदिर है जिसके गर्भगृह का निर्माण 10वीं-11वीं शताब्दी में हुआ था।

होलकरकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया

होलकरकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था, लेकिन किंवदंती है कि मूल मंदिर का निर्माण महाभारतकाल में पांडवों ने कराया था। मंदिर के पास ही करीब 156 एकड़ में फैला तालाब भी है। तालाब किनारे ओंकारेश्वर मंदिर है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की प्रतिकृति मांधाता के शिव मंदिर से मिलती-जुलती है।

यहां प्राचीन सिद्धेश्वर षडानन गणेश मंदिर है जिसमें भगवान गणेश की नृत्य मुद्रा में 11 फीट ऊंची मूर्ति है। इसके अलावा 52 भैरव, 64 जोगिनी, पाताल भैरवी और साढ़े 11 हनुमान मंदिर भी प्रसिद्ध हैं। विशेष मौकों पर यहां जानकार लोग सिद्धि के लिए भी आते रहते हैं। महेश्वर और मंडलेश्वर के बीच स्थित चोली गांव की आबादी करीब 7 हजार है, लेकिन पुरातत्व के लिहाज से यह बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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