रामकृष्ण मुले, इंदौर। वर्ष में एक बार महावीर जयंती पर निकलने वाले स्वर्ण रथ का स्वरूप बुधवार को समाजजन को निखरा हुआ नजर आएगा। 92 साल पुराना यह रथ अब पहले की तरह जर्जर नहीं रहा। रथ को चार शहरों के कारीगरों ने पिछले तीन माह में चुस्त-दुरुस्त करने के साथ नवीन स्वरूप प्रदान किया है। इसे नवीन स्वरूप देने के लिए 40 लाख की राशि खर्च की जा रही है।

इस पर हर साल 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के साथ समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति सारथी बनकर बैठते हैं। दिगंबर जैन समाज की रथ यात्रा की शुरुआत 98 साल पहले 1921 में सेठ हुकमचंद ने समाज की छह गोठ को एकजुट करने के लिए की थी। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी बताते हैं कि रथ के जीर्णोद्धार के लिए जयपुर, उज्जैन, मुंबई सहित चार शहरों के कारीगरों को बुलाया गया था। इसके स्वरूप को बरकरार रखने के लिए नेपाल से काले शीशम की लकड़ी खासतौर पर लाई गई थी, जबकि पहियों के लिए चेन मुंबई से लाकर लगाई गई है। जीर्णोद्धार का कार्य करीब 15 कारीगरों ने किया।

सामाजिक संसद के संरक्षक प्रदीपकुमार कासलीवाल ने बताया कि इसमें उखड़ चुके सोने के पतरों को दोबारा लगाया जा रहा है। सोने का काम अभी बाकी है। इस पर 950 ग्राम सोना खर्च हो रहा है। शेष काम महावीर जयंती के बाद दोबारा शुरू हो जाएगा।

स्वर्ण रथ समाज में आस्था का केंद्र

कांच मंदिर के मैनेजर नरेश सेठी बताते हैं कि रथ के जो घोड़े हैं, उन्हें भी पुनः ठीक कर लगाया गया है। इसके साथ ही चलने में असमर्थ हो गए इस रथ की चेन को भी बदला गया। महावीर जयंती के जलुसू में इसी स्वर्ण रथ पर भगवान महावीर स्वामी को विराजित किया जाता है। स्वर्ण रथ दिगंबर जैन समाज के लिए आस्था केंद्र है।

छह गोठ हुई थीं एकजुट

रथ यात्रा की शुुरुआत समाज की छह गोठ को एकजुट करने के लिए की गई थी। यात्रा के छह साल बाद ही स्वर्ण रथ बनवाया गया था। इसे साल में एक बार महावीर जयंती पर निकाला जाता है। पहले समाज, दिगंबर जैन लश्करी गोठ, दिगंबर जैन तेरापंथी गोठ, दिगंबर जैन मारवाड़ी गोठ, दिगंबर जैन माणकचंद मंगनीराम गोठ और रामाशाह दिगंबर जैन पंचलश्करी गोठ में बंटा हुआ था। इसके बाद जुलूस दिगंबर जैन माणकचंद मगनीराम गोठ के बैनर तले निकाला जाने लगा।

98 साल के रथ यात्रा के इतिहास में पहली बार होंगे ये तीन काम

- हर सोशल ग्रुप के साथ उनकी एक बग्घी रहेगी। इस पर समाज के प्रमुख लोग और उसके पीछे ग्रुप के सदस्य चलेंगे।

- इस वर्ष सामाजिक संसद की ओर से कोई मंच नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

- यातायात के नियमों के पालन के साथ समाजजन को मतदान करने की शपथ भी दिलाई जाएगी।