माटी के मंगलमूर्ति : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। गणेशोत्सव को ध्यान में रखकर प्लास्टर आफ पेरिस (पीओपी) और रासायनिक वस्तुओं से मूर्तियां बनाने और उनके विसर्जन पर इंदौर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है। पीओपी और रासायनिक वस्तुओं से होने वाले जल व मिट्टी प्रदूषण को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। परंपरागत मिट्टी से ही मूर्तियों का निर्माण किया जा सकेगा। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन में एडीएम ने यह आदेश जारी किया है। नईदुनिया के अभियान के बाद प्रशासन ने इस वर्ष समय से पहले यह प्रतिबंध लगाया है। पहले धारा-144 के तहत यह आदेश उस समय जारी किया जाता था, जब मूर्तियां बन चुकी होती थीं और यह प्रशासन का यह प्रतिबंध बेमानी साबित होता था।

एडीएम पवन जैन द्वारा जारी आदेश के अनुसार मूर्तियों, प्रतिमाओं के निर्माण में पकी हुई मिट्टी, पीओपी या किसी प्रकार की रासायनिक वस्तुओं का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। प्रतिमाओं के निर्माण में केवल उन्हीं प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाएगा जैसा कि पवित्र ग्रंथों में उल्लेखित है। मूर्तियों के निर्माण में परंपरागत मिट्टी का ही उपयोग किया जा सकेगा। रासायनिक और विषाक्त रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। तत्काल प्रभाव से लागू यह आदेश अक्टूबर, 2022 तक प्रभावशील रहेगा। इस अवधि में आदेश का उल्लंघन होने पर भारतीय दंड विधान की धारा-188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह करेगा नगर निगम - इंदौर में नगर निगम द्वारा मूर्तियों का सत्यापन किया जाएगा। यदि पीओपी या अन्य रासायनिक पदार्थों से प्रतिमाओं के निर्माण का मामला सामने आता है तो मूर्तियों को कब्जे में लेकर नगरीय ठोस अपशिष्ट नियम-2000 के प्रविधानों के अनुरूप निपटान किया जाएगा। मूर्तियों के विसर्जन से पहले फल-फूल, नारियल आदि पूजन सामग्री, वस्त्र, आभूषण, कागज और प्लास्टिक व कागज से बनी वस्तुओं को निकालकर अलग-अलग इकट्ठा किया जाएगा। इस सामग्री का निपटान भी स्थानीय निकायों द्वारा किया जाएगा। 24 घंटे के भीतर विसर्जित मूर्तियों व प्रतिमाओं में लगे बांस, रस्सी, मिट्टी, पीओपी प्रतिमा के हिस्से आदि को एकत्रित कर उनका निपटान भी किया जाएगा।

Posted By: Hemraj Yadav

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