इंदौर (ब्यूरो)। शहर की ऐसी बस्तियां, जहां के बच्चों का स्कूल से कोई नाता नहीं है, जो दिनभर काम करते हैं और पढ़ाई से वंचित हैं, उनके लिए मस्ती की पाठशाला उनकी बस्ती में ही आएगी। यह चलती-फिरती पाठशाला होगी, जिसमें बैठकर बच्चे पढ़ सकेंगे। इनके लिए दो विशेष बसें तैयार की जा रही हैं, जो क्लास रूम का काम करेंगी। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत जिला प्रशासन इस चलते-फिरते स्कूल की योजना पर काम कर रहा है। यानी जो बच्चे स्कूल नहीं जा सकते, स्कूल खुद उनके पास पहुंचेगा।

योजना के लिए चार्टर्ड बस ऑपरेटर ने सीएसआर के तहत बसें उपलब्ध कराई हैं। यही नहीं, बसों के लिए ईंधन और ड्राइवर भी वही उपलब्ध कराएंगे। शहर में कई ऐसे बच्चे हैं, जो सामान्य रूप से स्कूल नहीं जाते हैं। घर-परिवार की जरूरत या मजबूरी के कारण दिनभर किसी दुकान, संस्थान या अन्य जगह काम और मजदूरी करते हैं। इनके पास स्कूल जाने का समय नहीं होता, इसीलिए वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। काम-धंधे के कारण इनको शाम को ही फुर्सत मिल पाती है।

कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव का कहना है कि मस्ती की पाठशाला ऐसे ही बच्चों के लिए बनाई जा रही है। ऐसे बच्चे जो कभी स्कूल ही नहीं गए या ड्रॉप आउट हो गए हैं, वे मस्ती की पाठशाला के विद्यार्थी बनेंगे। जब शाम को वे काम-धंधा करके लौटेंगे तो यह विशेष बस उनके क्षेत्र में पहुंचेगी। बस को क्लास रूम की तरह सजाया जा रहा है, जिसमें बैठकर बच्चे पढ़ेंगे। प्रशासन ने बस तैयार कराने की जिम्मेदारी आरटीओ जितेंद्रसिंह रघुवंशी को सौंपी है। चार्टर्ड बस के संचालक रोशन अग्रवाल ने बताया कि गरीब व वंचित बच्चों की शिक्षा से जुड़ी इस योजना के लिए हम सहर्ष तैयार हो गए।

बस में रहेगा टीवी और नाश्ता भी मिलेगा

इन बच्चों को शिक्षित करने का विशेष मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। इसमें ऐसी शिक्षा प्रणाली होगी, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीख सकेंगे। ऐसे बच्चों के लिए शिक्षक भी विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे, जो रोचक और रचनात्मक तरीके से पढ़ा सकें। बस में टीवी भी होगा, जिस पर बच्चों को पढ़ाया जाएगा और उनको नाश्ता भी दिया जाएगा। एक बस में अधिकतम 40 बच्चे बैठकर पढ़ पाएंगे। हर दिन शाम को चिन्हित बस्ती में तय समय पर यह बस पहुंचेगी। बस ऐसे स्थान पर खड़ी होगी, जहां मैदान भी हो। यहां बस में पढ़ने के अलावा बच्चों को खेल भी खिलाए जाएंगे।