Mhow-Omkareshwar Train: ओंकारेश्वर से नवीन यादव (नईदुनिया)। महू के डा. आंबेडकर नगर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक से मीटरगेज का सफर सोमवार से हमेशा के लिए खत्म हो गया। महू से ओंकारेश्वर जाने वाली मीटरगेज ट्रैक की ट्रेन सोमवार को अंतिम बार रवाना हुई। मंगलवार से यह ट्रेन नहीं चलेगी। इस रेलवे लाइन को ब्राडगेज में बदलने के लिए इस ट्रेन को बंद किया जा रहा है। ट्रेन को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा।

ट्रेन के लोको पायलट और सह पायलट का लोगों ने माला पहना कर स्वागत किया तो दूसरी तरफ ट्रेन में लगातार सफर करने वाले निराश भी थे। उनका कहना था कि इस ट्रेन के बंद करने से लोगों को परेशानी होगी। रास्ते के पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा, बड़वाह स्टेशनों पर भी जब ट्रेन ने स्टाप लिया तो लोग यही कहते नजर आए कि कल से इस समय ट्रेन की आवाज नहीं सुनाई देगी। आज यह ट्रेन आखिरी है। खाली रूट होने से यह ट्रेन हमेशा हर स्टेशन पर तय समय से पहुंचती थी। ट्रेन की आवाज सुनकर लोग समय का अंदाजा लगा लेते थे।

100 से अधिक यात्री सवार थे

डा. आंबेडकर नगर ओंकारेश्वर रोड स्पेशल पैसेंजर तय समय शाम 5.45 बजे महू स्टेशन से रवाना हुई। इससे पहले यहां पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। उन्होंने लोको पायलट दौलतराम मीणा और सह पायलट ऋषि कुमार का स्वागत किया। स्टेशन मास्टर एसके शुक्ला ने बताया कि ओंकारेश्वर से आने वाली ट्रेन मंगलवार सुबह वापस आई। महू से जाने वाली ट्रेन में करीब 100 से अधिक यात्री सवार हुए थे। रात 8.02 बजे ट्रेन ओंकारेश्वर स्टेशन पर पहुंची।

अब नई पोस्टिंग का इंतजार

ट्रेन के लोको पायलट दौलतराम मीणा ने बताया कि वे करीब एक साल से यह ट्रेन चला रहे हैं। इसके पहले वे दूसरी ट्रेन चलाते थे। उनके सह पायलट ऋषि कुमार हैं। एक साल में इस ट्रैक से अलग ही जुड़ाव हो गया था। ओंकारेश्वर आने के बाद ट्रेन के इंजन को बदला जाता है। ढलान होने से ट्रेन को यहां पर पटरी से बांध के रखा जाता है। अब मुझे रेलवे नई पोस्टिंग दे देगा। ट्रेन के प्रबंधन रोशनलाल कौशल ने बताया कि वे इसके अलावा हेरिटेज ट्रेन को भी लेकर आते हैं। सालों से इसी ट्रैक पर चल रहे हैं। रास्ते में कई बार ट्रेन को रोक कर उसके ब्रेक भी चेक किए जाते हैं।

60 पैसे के किराए से कर रही सफर

कालाकुंड की रहने वाली पुतला बाई भी इस ट्रेन में सवार थीं। उन्होंने बताया कि 1955 से इस ट्रेन में सफर कर रही हूं। पहले इसका किराया 60 पैसे था। फिर बढ़कर 80 पैसे तो बाद में दो रुपये हो गया था। जरूरी सामान लेने के लिए महू जाना पड़ता था। घर के पास स्टेशन था, तो ट्रेन में बैठ के महू जाकर खरीदी कर आते थे। अब मुश्किल होगी। एक अन्य यात्री मोहम्मद जाहिद अपने परिवार के साथा विवाह समारोह में शामिल होने के लिए बड़वाह जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 30 रुपये प्रति व्यक्ति के किराए में यह सुरक्षित सफर हो जाता था। अब बस या निजी वाहन से जाना होगा। अपने परिवार को लेकर जा रही गंगा कौशल ने बताया हम बड़वाह जा रहे हैं। दो घंटे के बिना परेशानी के सफर में घर पहुंच जाते थे, लेकिन अब दिक्कत होगी। बसों का महंगा सफर करना होगा।

कैमरे में कैद कर लेना चाहते थे हर दृश्य को

ट्रेन बंद होने को लेकर जहां रोजाना सफर करने वाले यात्रियों में निराशा थी, वहीं कुछ ऐसे लोग भी सवार थे, जो मीटरगेज के इस आखिरी सफर का मजा लेने आए थे। इंटरनेट मीडिया पर इस तरह के वीडियो बनाने वाले युवा भी इस ट्रेन में सवार थे। लोग ट्रेन के इंजन के आगे खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे। वहीं रास्ते में भी यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए तस्वीरें खींच रहे थे। कई लोग गुजरात, जबलपुर जैसी जगहों से केवल अंतिम बार इस ट्रेन में सफर करने आए थे।

Posted By: Hemraj Yadav

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