Mokshada Ekadashi: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सनातन हिंदू धर्म में गीता जयंती का खास धार्मिक महत्व है। हर साल गीता जयंती मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2022 में गीता जयंती दो दिन मनाई जा रही है। तीन दिसंबर को स्मार्त और चार दिसंबर को वैष्णव मत के अनुसार मनाई जा रही है।

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, जिसके बाद भगवद-गीता अस्तित्व में आई। यही वजह है कि गीता जयंती को लोग खास तौर पर मनाते है व इसे मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं।

- गीता जयंती -मोक्षदा एकादशी (स्मार्त)- 03 दिसंबर 2022 शनिवार को एकादशी तिथि प्रारंभ सुबह 5:40 बजे से होगी। एकादशी तिथि समाप्त चार दिसंबर को सुबह 05:34 बजे होगी। चार दिसंबर को मोक्षदा एकादशी (वैष्णव) रहेगी। इस बात की जानकारी महाराष्ट्रीयन, जोधपुर व अन्य पंचांगों में दी गई है।

ऐसे करें व्रत

ज्योतिर्विद कान्हा जोशी के अनुसार ऐसे में इस दिन व्रत रखना शुभ और मंगलकारी होता है। गीता जयंती का विधिवत व्रत रखने के लिए इससे एक दिन पहले यानी दशमी के दिन से सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। गीता जयंती के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। इसके साथ ही इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद नित्यकर्म से निवृत्त होकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर या किसी मंदिर में जाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। भगवान को पीले पुष्प, फूल, धूप-दीप आदि अर्पित करें। इसके बार गीता का पाठ करें, फिर शाम के समय आरती अर्चना और प्रार्थना के पश्चात फलाहार करें। एकदाशी व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है।

शहरभर में कई आयोजन

गीता जयंती के मौके पर शहर में कई आयोजन हो रहे है। इसमे गीता भवन मनोरमागंज और अग्रसेन धाम फूटी- कोटी गीता जयंती महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ ही इस्कोन मंदिर निपानिया में भी गीत जयंती हर्षोल्लास से मनाई जा रही है।

Posted By: Sameer Deshpande

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