इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Whatsapp Privacy Indore। यूजर का डेटा फेसबुक को भी एक्सेस करने की अनुमति लेने के लिए वॉट्सएप द्वारा जारी नोटिफिकेशन पर इंटरनेट मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। वॉट्सएप सुरक्षित है या नहीं, इस पर काफी बहस हो रही है। इसके चलते कई यूजर सिंगल और टेलीग्राम जैसे एप पर डायवर्ड हो रहे हैं। आइटी और साइबर की दुनिया के विशेषज्ञों का कहना है कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद कई एप पहले से यूजर का डेटा एक्सेस करते रहे हैं। इनका उपयोग अन्य जगहों पर होता है। इन डेटा का मकसद यूजर की कुछ एक्टिविटिज को वॉच करना होता है। जैसे कि यूजर किन विषयों से संबंधित सामग्री को ज्यादा पसंद करते हैं और किन जगहों पर उनका आना-जाना लगा रहता है। इससे कंपनियों को इंटरनेट मीडिया में यूजर की पसंद और न पसंद के अनुसार विज्ञापन प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्ले स्टोर से कई एप को डाउनलोड करते समय ही मोबाइल के कांटेक्ट नंबर और गैलरी तक एक्सेस कर ली जाती है।

नोटिफिकेशन को निरस्त करने का ऑप्शन भी यूजर को देना चाहिए

आइटी विशेषज्ञ हिमांशु जाजोदिया का कहना है कि वॉट्सएप द्वारा जारी किए गए संदेश में प्राइवेसी संदेश को स्वीकार करने का ही ऑप्शन दिया जा रहा है। नोटिफिकेशन को क्रॉस करने पर फिर से संदेश आ जाता है। ऐसे में वॉट्सएप ने यूजर को मजबूर कर दिया कि उन्हें प्राइवेसी नोटिफिकेशन को स्वीकार ही करना होगा। यह भी कहा गया कि अगर संदेश को स्वीकार नहीं किया जाता है तो वॉट्सएप को सुचारू संचालित करना संभव नहीं हो पाएगा। तकनीकी दुनिया में इस तरह के एक तरफा संदेश जारी करना यूजर के लिए सही नहीं होता है। यूजर को नोटिफिकेशन को निरस्त करने का ऑप्शन भी देना चाहिए। इसके कारण से कई यूजर सिंगल मैसेंजर पर डायवर्ड हो रहे हैं। हालांकि तकनीकी दुनिया में अन्य एप की बात करें तो कई एप को डाउनलोड करते समय ही कई तरह का डेटा पहले ही एक्सेस करने की अनुमति ले ली जाती है, जिसका यूजर को ध्यान रखने की जरूरत है।

यूजर को बहुत देरी से पता लगता है कि डेटा इंटरनेट पर आ गया है

साइबर सिक्यूरिटी विशेषज्ञ चातक वाजपेयी का कहना है कि पबजी एप हो या फोटो और वीडियो को एडिट करने वाले एप। कई तरह के रोजमर्रा के कामों में आने वाले वाले एप यूजर का डेटा एक्सेस करते हैं। एप को डाउनलोड करने पर यूजर बारिकी से अगर प्राइवेसी शर्तों को पढ़े तो उन्हें पता लगेगा कि कई एप कान्टेक्ट नंबर तक एक्सेस कर लेती है। लोकेशन और गैलरी एक्सेस की अनुमति भी एप ले लेते हैं। चूंकि अपनी जरूरत के अनुसार यूजर एप डाउनलोड कर लेते हैं लेकिन सोचते नहीं है कि इसका आगे जाकर क्या नुकसान हो सकता है। बाद में इंटरनेट पर जब यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सर्च इंजन में आ जाती है तो यूजर समझ भी नहीं पाते हैं कि उनकी जानकारी अन्य वेबसाइट पर कैसे चली गई।

कई कंपनियां डेटा लेने के लिए निशुल्क सुविधाएं देती है

साइबर एक्सपर्ट शशांक चोरे का कहना है कि ऐसी बहुत कम एप है जो बिना प्रॉफिट के संचालित हो रही है। जिन एप पर विज्ञापन नहीं दिखाए जाते हैं जरूरी नहीं है कि वे एप डेटा नहीं लेते हैं। इस समय के दौर में सभी कंपनियों के लिए डेटा महत्वपूर्ण हो गया है। इसे लेने के लिए कई कंपनियां कई तरह की निशुल्क सुविधाएं तक उपलब्ध करा रही हैं। इसके बहाने यूजर लंबे समय तक एप का उपयोग करते हैं और कंपनियां इससे कई तरह के एनालिटिक्स तैयार करके काफी प्रॉफिट कमाती रहती है।

Posted By: Sameer Deshpande

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