MP High Court: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग के उज्जैन स्थित बालक छात्रावास में सहायक वार्डन के रूप में पदस्थ एक महिला को नौकरी से निकालने के वर्ष 2018 में जारी आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने महिला को दोबारा नौकरी पर रखने और हर्जाने के रूप में उसे पांच लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। आरोप था कि सहायक वार्डन ने अंकसूची के साथ छेडछाड़ की थी, लेकिन यह बात साबित ही नहीं हो सकी।

पुष्पा चौहान की नियुक्ति वर्ष 2007 में स्कूली शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले बालक छात्रावास में बतौर सहायक वार्डन हुई थी। नियुक्ति के वक्त उन्होंने अपनी हाई स्कूल, हायर सेकंडरी और स्नातक की अंकसूची प्रस्तुत की थी। यह नियुक्ति नियत समय के लिए थी, लेकिन समय-समय पर उनके दस्तावेजों का सत्यापन होता रहा और नियुक्ति जारी रखी गई। वर्ष 2018 में असिस्टेंट प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर ने सभी सहायक वार्डनों से अपने असल दस्तावेज जमा कराने को कहा।

जेल में रहने के दौरान बच्ची को दिया जन्म

इन दस्तावेजों की जांच के बाद पुष्पा चौहान पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अंकसूची से छेड़छाड़ की है। उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ पुलिस में प्रकरण भी दर्ज करा दिया गया। उस वक्त वे गर्भवती थीं। जेल में रहते हुए ही उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। एक साल पांच महीने और 12 दिन जेल में रहने के बाद 18 फरवरी 2020 को उन्हें जमानत मिली।

चार सप्ताह में देना होगी हर्जाने की रकम

पुष्पा चौहान ने पद से हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि यह साबित ही नहीं हो रहा है कि अंकसूची से छेड़छाड़ किसने की थी। कोर्ट ने पुष्पा चौहान को आरोपों से मुक्त करते हुए शासन को आदेश दिया कि वह उन्हें नौकरी पर बहाल करे और बतौर हर्जाना पांच लाख रुपये अदा करे। यह रकम चार सप्ताह में देना होगी।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close