MP High Court: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिस मां ने अपने बेटों को पढ़ा लिखाकर इस लायक बनाया कि वे अपने पैरों पर खड़े होकर समाज में गर्व से सिर उठा सकें, वही 80 वर्ष की उम्र में बेटों के खिलाफ न्यायालय में लड़ने को मजबूर है। कोर्ट के आदेश के बावजूद आर्थिक रूप से संपन्न उसके दोनों बेटे उसे भरण पोषण नहीं दे रहे हैं। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मां के दोनों बेटों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

मामला इंदौर के गणेशपुरी निवासी पुष्पा पत्नी महेश कसेरा और उनके बेटों तनय कसेरा और शिवांक कसेरा का है। 11 जुलाई 2017 को कुटुम्ब न्यायालय ने आदेश दिया था कि तनय हर माह 11 हजार रुपये और शिवांक हर महीने साढ़े चार हजार रुपये मां पुष्पा कसेरा को भरण पोषण के रूप में देंगे। मां को भरण पोषण देने के बजाय दोनों बेटों ने इस फैसले को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चुनौती दी। मई 2019 में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने बेटों की याचिका निरस्त करते हुए कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को यथावत रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह बहुत दुख की बात है कि बुजुर्ग मां को बेटों से भरण पोषण पाने के कोर्ट के चक्कर लगाना पड़े। यह बच्चों की जिम्मेदारी है कि वे बुजुर्ग मां की देखभाल करें और उन्हें भरण पोषण दें। वे ऐसा नहीं करते हैं तो माना जाएगा कि वे कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं।

कोर्ट का आदेश भी नहीं माना - कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद बेटों ने भरण पोषण नहीं दिया तो मां ने एडवोकेट आकाश शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत कर दी। इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सात दिसंबर 2021 और 11 अप्रैल 2022 को बेटों का जमानती वारंट जारी किया, लेकिन वे न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। एडवोकेट शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को न्यायमूर्ति नंदिता दुबे ने दोनों बेटों तनय और शिवांक के गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। उन्हें 10 जनवरी 2023 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना ही पड़ेगा। पुष्पादेवी का बेटा तनय कंपनी सेक्रेटरी है। दूसरा शिवांक नीमच में बर्तन व्यापारी है। दोनों बेटे आर्थिक रूप से संपन्न हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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