MP High Court : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आम आदमी की मामूली चूक पर प्रकरण दर्ज करने को तत्पर पुलिस नगर निगम और बिजली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई में कितनी लापरवाह है इसका एक उदाहरण सामने आया है। हीरानगर थाना क्षेत्र में दो साल पहले 12 वर्षीय बच्ची की बिजली के पोल से करंट लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में नगर निगम और बिजली कंपनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करना तो दूर मर्ग तक कायम करना तक जरूरी नहीं समझा। बच्ची के पिता मामले की जांच की गुहार लगाते रहे ताकि पता चल सके कि उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आखिर मामला हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि वह 15 दिन के भीतर जांच कर जरूरी कार्रवाई करे।

मामला गणेश नगर में रहने वाले पप्पू हासले का है। उनकी 12 वर्षीय बेटी सिमरन की 4 जून 2020 को बिजली के पोल से करंट लगने से मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर तो पहुंची लेकिन न मर्ग कायम किया न बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। 11 जून 2020 को बच्ची के पिता ने पुलिस को आवेदन देकर मामले की जांच की गुहार लगाई लेकिन कुछ नहीं हुआ। नवंबर 2020 में बच्ची के पिता ने एक बार फिर पुलिस को आवेदन दिया लेकिन इस बार भी कोई कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा गया। आखिर उन्होंने एडवोकेट सुमित मंडलोई के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जांच के आदेश - एडवोकेट मंडलोई ने बताया कि याचिका में बिजली कंपनी ने जवाब में कहा कि हादसे वाले दिन पूरे इलाके के बिजली पोल में करंट फैल गया था। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नगर निगम के पास है। बिजली कंपनी ने नगर निगम को इस संबंध में सुधार कार्य के लिए कहा भी था लेकिन निगम ने कुछ नहीं किया। इधर शासन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता खुद ही कार्रवाई नहीं चाहते थे। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने सभी पक्षों को सुनने के बाद हीरानगर पुलिस थाना को आदेश दिया कि वह 15 दिन में मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे और इस संबंध में याचिकाकर्ता को भी सूचित करे।

Posted By: Hemraj Yadav

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