MPPSC Exam: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सवा साल पहले हो चुकी राज्यसेवा-2019 की मुख्य परीक्षा संकट में फंस चुकी है। परीक्षा दोबारा आयोजित होने के संकेत मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग की ओर से दिए जा चुके हैं। इस परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थी भी दो धड़ों में बंट चुके हैं। पूर्व में हुई इस परीक्षा में इंटरव्यू के अंतिम दौर तक पहुंचे 1918 अभ्यर्थी चाहते हैं कि किसी भी स्थिति में पुरानी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाना चाहिए। हालांकि पीएससी की प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट से लड़ाई जीत चुके अभ्यर्थी पूरी मुख्य परीक्षा फिर से करवाने की बात पर अड़े हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग चाहे तो 2019 की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाकर अभ्यर्थियों को होने वाले नुकसान से राहत दे सकता है।

राज्यसेवा 2019 की कानूनी लड़ाई आरक्षण के नियमों में हुए बदलावों को लेकर थी। मुख्य परीक्षा 21 से 26 मार्च 2021 तक हुई थी। पीएससी ने इसमें नया नियम लागू करते हुए आरक्षित श्रेणियों के मेरिट होल्डर अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीटों पर जगह न देते हुए उनकी आरक्षित श्रेणी की मेरिट में जगह दी थी। आरक्षण लागू करने के इसी बदलाव के खिलाफ निर्णय देते हुए कोर्ट ने पुराने नियम से फिर से परिणाम घोषित करने का फैसला सुनाया है।

पीएससी के बदलावों के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले अभ्यर्थी आकाश पाठक ने कहा कि जब परीक्षा हो रही थी, तभी हमने आयोग से आग्रह किया था कि वह असंवैधानिक नियमों के आधार पर परीक्षा न करवाए। मामला कोर्ट में लंबित था, लेकिन आयोग ने अंतिम आदेश का इंतजार करते हुए प्रक्रिया नहीं रोकी। अब प्रारंभिक परीक्षा के बदले परिणाम के साथ मुख्य परीक्षा भी जल्द से जल्द फिर से आयोजित की जानी चाहिए। पुराने नियमों के हिसाब से अनारक्षित श्रेणी की सीटों पर मेरिट में आने वाले आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को जगह दी जाएगी।

ऐसे में साफ है कि कई ऐसे विद्यार्थी जो अनारक्षित श्रेणी के हैं, वे प्रतिस्पर्धा से बाहर हो सकते हैं। हम आयोग से मांग कर रहे हैं कि राज्यसेवा 2019 में सौ पद बढ़ा दिए जाएं और उसके अनुपात में प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हो। इससे अनारक्षित श्रेणी के वे अभ्यर्थी जो इंटरव्यू तक पहुंचे हैं और नए कटआफ से कम अंक होने के कारण प्री परिणाम में बाहर हो सकते, वे सफल उम्मीदवारों की सूची में आ जाएंगे।

ग्वालियर के अभ्यर्थी मधुर पाराशर ने कहा कि मैं भी उस समय 2019 की मुख्य परीक्षा रोकने के आंदोलन में शामिल था। मेरे जैसे हजारों अभ्यर्थी थे, जिन्हें 7 अप्रैल 2022 को हाई कोर्ट के निर्णय के बाद न्याय मिला है। 2015 नियम अनुसार अब सभी की मुख्य परीक्षा आयोजित की जाए। जब आयोग ने शुरू में जारी परिणाम के समय कह दिया था कि यह परीक्षा हाई कोर्ट के निर्णय के अधीन रहेगी तो फिर असंवैधानिक मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों कोई अधिकार ही नहीं है कि वे इंटरव्यू की मांग करें।

एक चयन के लिए नहीं हो सकती दो परीक्षाएं

याचिकाकर्ताओं के वकील विभोर खंडेलवाल के अनुसार अब भी कुछ लोग बीच का रास्ता निकालने और असंवैधानिक नियमों से हो चुकी परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखने की मांग करते हुए मध्य मार्ग की बात कह रहे हैं। ये लोग उम्मीद कर रहे हैं कि कोर्ट के आदेश के बाद सफल होने वाले अभ्यर्थियों की अलग से मुख्य परीक्षा आयोजित करवा ली जाए। उनका पुराना परिणाम भी बरकरार रखा जाए। हालांकि ऐसा कानूनी रूप से संभव नहीं हो सकता। एक ही चयन के लिए दो अलग-अलग परीक्षाएं और प्रक्रियाएं नहीं हो सकती। वह भी ऐसे में जबकि मुख्य परीक्षा के अंक चयन के अंतिम परिणाम में शामिल होते हैं। ऐसे में राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा के संशोधित परिणाम के बाद सभी अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा करवाना ही एकमात्र विकल्प है। प्रारंभिक परीक्षा परिणाम के पुनरीक्षण के बाद जो परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होंगे उनकी पृथक से परीक्षा ली जाना नियम विरुद्ध है, सभी परीक्षार्थियों की मुख्य परीक्षा फिर से एक साथ लेनी होगी।

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