लोकेश सोलंकी, इंदौर Remedicivir Injection Indore। कोरोना के मरीजों की जान बचाने में अहम साबित हो रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत से इंदौर समेत प्रदेश के तमाम शहर-कस्बे हलाकान हैं। मरीजों के स्वजन एक-एक इंजेक्शन के लिए अस्पताल से लेकर दवा की दुकानों तक की खाक छान रहे हैं। आम व्यक्ति को बड़ी मुश्किल से ऊंचे दामों पर इंजेक्शन मिल पा रहे हैं। देश में छह से ज्यादा दवा कंपनियां रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति कर रही हैं। कोरोना काल में लाइफ सेविंग ड्रग बन चुके इस इंजेक्शन के अधिकतम खुदरा मूल्य (एआरपी) मेें बड़ा झोल है। इंजेक्शन के वायल पर उसके थोक मूल्य से छह गुना तक एमआरपी प्रिंट की जा रही है। नतीजतन न केवल ब्लैक में बल्कि एमआरपी पर इंजेक्शन खरीदने वाले मरीज भी सरेआम ठगे जा रहे हैं।

किसी भी कंपनी के रेमडेसिविर इंजेक्शन की थोक में कीमत एक हजार रुपये से ज्यादा नहीं है, लेकिन इंजेक्शन पर एमआरपी थोक मूल्य से भी छह गुना तक छापी जा रही है। फिलहाल जायडस केडिला कंपनी इंजेक्शन पर सबसे कम एमआरपी छाप रही है। यह कंपनी अपने इंजेक्शन को थोक में 720 रुपये में उपलब्ध कराते हुए उस पर 899 की एमआरपी छाप रही है। जबकि अन्य दवा कंपनियों के इंजेक्शन की थोक कीमत भी इसके आसपास ही है, लेकिन एमआरपी कई गुना ज्यादा छापी जा रही है।

मप्र स्माल स्केल ड्रग मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ने ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया डा. वीडी सोमानी को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इंजेक्शन की किल्लत इसके उत्पादन की कमी नहीं अपितु कुप्रबंधन से बन रही है। ऐसे में इंजेक्शन आपूर्ति की व्यवस्था की निगरानी की जानी चाहिए। एसोसिएशन के अध्यक्ष हिमांशु शाह के अनुसार साफ नजर आ रहा है कि कुछ लोग ऐसे समय में भी पैसा कमाने के लिए इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। कई कंपनियों की ओर से अस्पतालों के डिमांड ड्राफ्ट भी बिना कारण के लौटाए जा रहे हैं जबकि कुछ निजी स्टाकिस्टों को इंजेक्शन दे दिया जाता है। आम आदमी जान बचाने की मजबूरी में मुंहमांगी कीमत चुका रहा है।

शाह के अनुसार हमने सरकार से मांग की है कि इस इंजेक्शन के निर्यात पर तुरंत रोक लगा दी जानी चाहिए। ऐसा होते ही देश में आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। दूसरा इस इंजेक्शन की असल कीमत और एमआरपी में भारी अंतर है। इस खाई को भी पाटा जाना चाहिए। सरकार ने जैसे सैनिटाइजर जैसी सामान्य वस्तु की कोरोना काल को देखते अधिकतम कीमत और एमआरपी छापने की सीमा तय कर दी है तो इस इंजेक्शन की एमआरपी क्यों नहीं तय की जा रही है? एमआरपी की मनमानी से भी मजबूर मरीजों को कुछ लोग ठग रहे हैं।

इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के अनुसार एसोसिएशन के जरिए हर दिन किसी न किसी तरह से जरूरतमंद मरीजों को 200 से ज्यादा इंजेक्शन कहीं न कहीं से उपलब्ध करा रहे हैं। अभी मात्र अस्पतालों में आपूर्ति है। सरकार कीमत तय करने के साथ लाइसेंसधारी केमिस्टों को वितरण में शामिल करती है तो अच्छा होगा। एसोसिएशन अपनी ओर से कालाबाजारी रोकने की कोशिश कर रही है।

थोक दाम और एमआरपी का अंतर

कंपनी थोक दाम एमआरपी

सिप्ला 880 रुपये 4000

हेट्रो हेल्थकेयर 850 5400

जुबलीएंट लाइफ साइंसेस 1000 4,800

इलिया लैबोरेटरीज 1000 3900

डा. रेड्डीज 825 5,400

जायड्स कैडिला 720 899

(ड्रग निर्माताओं से मिली जानकारी के अनुसार)

Posted By: Sameer Deshpande

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