इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर की एक बस्ती साउथ तोड़ा में गंगा-जमुनी तहजीब देखने को मिली। यहां एक गरीब वृद्धा का निधन हो गया। लॉकडाउन के कारण रिश्तेदार नहीं आ पाए तो बस्ती के मुस्लिम युवकों ने अंत्येष्टि की तैयारी की। वे अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट ले गए और अंत्येष्टि का खर्च भी उन्होंने ही उठाया। कोरोना के इस दौर के बीच एक तरह जहां जज्बातों और रिश्तों की डोर कमजोर होती दिख रही है, वहीं इन युवकों ने भाईचारे की मिसाल कायम की। साउथ तोड़ा के जूना गणेश मंदिर के पास रहने वाली दुर्गा मां लकवे का शिकार हो गई थीं। उनके दो बेटे हैं। वे बड़े बेटे के पास रहती थीं। परिवार बहुत ही गरीब है। रात को उनकी मौत हो गई। जब यह बात बस्ती के असलम, अकील, सिराज, इब्राहिम, आरिफ को पता चली तो वे सोमवार सुबह दुर्गा के घर आए।

परिवार के लोगों ने शव वाहन के लिए कॉल किया, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। कोरोना के कारण बस्ती के दूसरे लोग शवयात्रा में शामिल होने से हिचक रहे थे। इसके बाद मुस्लिम युवकों ने अर्थी को कांधा दिया और घर से ढाई किलोमीटर तक ले गए। इस दौरान शारीरिक दूरी का भी पालन किया। असलम ने कहा कि शवयात्रा में शामिल होकर हमने कोई बड़ा काम नहीं किया। यह हमारा फर्ज था। जब हम बच्चे थे तो उनकी गोद में खेला करते थे। वे हमारे लिए मां जैसी ही थीं। उस परिवार को जो भी मदद लेगी, हम उसे देने के लिए तैयार रहेंगे। अर्थी को कंधा देते युवकों की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई।

Posted By: Prashant Pandey

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