Naidunia Gurukul: नईदुनिया गुरुकुल में इस बार का विषय इस तरह का है, जिसे बच्चों, परिवार के सदस्यों और स्कूल के सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से पढ़ना चाहिए। डिजिटल संस्कार के तहत बुधवार को इंटरनेट मीडिया पर अनावश्यक दिखावा कहानी प्रकाशित हुई है। इसमें विवेक और अन्नू दो दोस्त रहते हैं और अन्नू इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर अनजान व्यक्ति से दोस्ती करके मुसीबत में पड़ जाता है। अन्नू किसी को बताए बिना मम्मी के एटीएम कार्ड से एक अनजान व्यक्ति को दस हजार रुपये ट्रांसफर कर देता है।

अन्नू को जब पैसा वापस नहीं मिलता तो वह तनाव में आ जाता है और घर से कहीं दूर चला जाता है। बड़ी मुश्किल से पुलिस को वह मिलता है तो पता लगता है उसने गलत काम किया। किसी अनजान व्यक्ति को बिना बताए मम्मी-पापा का पैसा दे दिया। इस कहानी को अगर विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे तो इसमें कई तरह की सीख नजर आती है।

इस समय कई बच्चों को मोबाइल की आदत हो गई है और वे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर कई अनजान व्यक्तियों से पहचान कर लेते हैं। ऐसे में कई बच्चों के साथ आर्थिक और अन्य तरह के अपराध हो रहे हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि बच्चों को मोबाइल का सही उपयोग कैसे करें, यह बताया जाए। बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं, इसकी जानकारी भी परिवार के सदस्यों को होनी चाहिए।

आजकल कई छोटे बच्चे भी विभिन्न प्लेटफार्म से जुड़ गए हैं और वे वहां क्या कर रहे हैं इसकी भनक कई लोगों को नहीं होती। कई बच्चे विभिन्ना तरह के आनलाइन गेम्स खेलते हैं तो कई अनजान दोस्तों के साथ कई घंटे बात करते रहते हैं। ऐसे में सायबर अपराध होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। माता-पिता ही नहीं स्कूल के शिक्षकों को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के व्यवहार में कोई बड़ा बदलाव तो नहीं दिख रहा।

कई बार बच्चे डर के कारण बातें माता-पिता को नहीं बता पाते, लेकिन शिक्षकों को बता देते हैं। ऐसे में कक्षा के दौरान विद्यार्थियों से बात करते रहना चाहिए और कई बार उनसे व्यक्तिगत बात करके परेशानियों को जान सकते हैं। हम समय-समय पर स्कूल में ऐसे कार्यक्रम करते हैं, जिससे बच्चों को सायबर अपराध और इंटरनेट के नुकसान बताते हैं।

बच्चों को मोबाइल चलाते समय किस तरह की सावधानी रखनी चाहिए, इसकी अगर उन्हें जानकारी मिल जाती है तो वे कभी भी अनजान लोगों से बात नहीं करते। अगर किसी बच्चे को कोई परेशान कर रहा है या वे कोई मुसीबत में पड़ गए हैं तो बिना डरे सबसे पहले अपने माता-पिता को बातें साझा करना चाहिए। माता-पिता को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों से गलती होती है, वे हर बात पर बच्चों को डांटे नहीं। सप्ताह या महीने में कुछ दिन बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं और उनके व्यक्तिगत जीवन में क्या चल रहा है, यह जानने की कोशिश करना चाहिए। अगर माता-पिता बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह रहेंगे तो वे आसानी से अपनी बातें साझा कर सकेंगे।

- संगीता उप्पल, प्राचार्या मिलेनियम स्कूल

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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