Naidunia Gurukul : इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नईदुनिया गुरुकुल में बुधवार को इंटरनेट मीडिया पर बहस के संस्कार विषय पर आधारित कहानी ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि इंटरनेट मीडिया का बच्चों के मन पर कितना गहरा असर होता है। कहानी की मुख्य पात्र राखी के मन पर इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर हुई बहस के कारण जो नकारात्मक प्रभाव पड़ता है उससे वह स्वयं व स्वजनों के बारे में भी नकारात्मक हो जाती है, लेकिन दूसरी ओर उसे दादी की उपस्थिति से साहस भी मिलता है और उनकी कहीं बात याद आ जाती है कि जो काम करना है बड़े होकर कर लेना अभी तो पढ़ो लिखो।

इसी बात के आधार पर वह वाद-विवाद प्रतियोगिता के विषय धहम घर के कामों में हाथ बटाएंध के विपक्ष में बोल पाती हैं, परंतु उसके मन में चल रही उथल-पुथल एवं दोस्तों की नकारात्मक प्रतिक्रिया से उसका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है और वह सोचती है कि सच ही तो है हमें घर के कामों में भी हाथ बटाना चाहिए। वही कहानी की दूसरी पात्र प्रियंका के द्वारा मैडल पहनाकर फोटो फेसबुक पर डालने से राखी के मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।इन दिन के पूरे 24 फेसबुक, टि्वटर, इंस्ट्राग्राम, यूट्यूब आदि पर विभिन्न प्रकार की बहस चलती रहती है।

कभी धर्म पर, कभी राजनीति पर कभी अधिकारों पर इन सभी बहसों ने हमारे ड्राइंग रूम, बेडरूम, किचन, कार, दफ्तर तक में घुसपैठ कर ली है।इंटरनेट मीडिया अब बुद्धि, विवेक और भावना सब को नियंत्रित कर रहा है। इंटरनेट मीडिया पर बहस को देखने और सुनने के बाद नागरिक इसकी चर्चा चाय की दुकान से लेकर दफ्तर तक करते रहते हैं। प्रेम, घृणा, उत्साह के भाव हो अथवा किसी क्षेत्र में कुशलता अर्जित करने की चुनौती हो, सबकी और सारी राहें इंटरनेट मीडिया के बहस संस्कार से होकर गुजरती हैं।

नईदुनिया गुरुकुल में प्रकाशित कहानी में वाद-विवाद प्रतियोगिता ने मुझे स्कूल में हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता की याद दिला दी, जिसमें एक बच्ची के द्वारा कहे गए शब्द मुझे आज भी याद है कि इंटरनेट, फेसबुक, टि्वटर इन सब को बनाने वाला एक इंसान ही है।

अत: इंसान के दिमाग से ज्यादा बुद्धिमान कोई भी नहीं है इसलिए बच्चों को हमें यह सिखाना जरूरी है कि वह स्वयं की सोच वह स्वयं के विवेक से किसी भी विषय को समझें सोचे एवं फिर उस बारे में अपने विचार रखें न कि केवल इंटरनेट पर आने वाले कमेंट और बातों को अपने मन में रखकर नकारात्मक सोचे। बच्चों के कोमल मन पर फेसबुक पर होने वाली बहस का बहुत ही गंभीर असर पड़ता है।

इंटरनेट मीडिया के प्रभाव में आने से पहले बच्चे अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के द्वारा कही गई बात पर आंख मूंद कर विश्वास करते थे एवं अमल भी करते थे। लेकिन आज जिस तरह से इंटरनेट मीडिया का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। बच्चे भी छोटी-छोटी बातों पर अपने माता-पिता एवं शिक्षकों से बहस करने लगे हैं।नईदुनिया गुरुकुल में प्रकाशित कहानियां हमेशा ही बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करती है।

- हेमा पाटीदार, प्राचार्या, सेन मेरीनो पब्लिक स्कूल

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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