Naidunia Ke Sang Indore Ka Man : श्रेणिक जैन, वरिष्ठ चित्रकार। इंदौर का कला से गहरा नाता रहा। आज की देवलालीकर कला वीथिका किसी समय चित्रकला मंदिर के नाम से जानी जाती थी। असल में यह वह शहर है जहां की मिट्टी कला को सींचती है। यहां विद्यार्थी अपने अनुरूप गुरु स्वयं ही तलाश लेते हैं। मैं 1950 में इंदौर में कला की बारीकियां सीखने आया था और तबसे यहीं हूं। कुछ तो बात है यहां की आबोहवा में, लोगों के स्वभाव में जो अपने से बांधे रखती है।

जिस तरह आज यह शहर एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है उसी तरह पहले भी यहां दूर-दूर से लोग पढ़ने आया करते थे। उस समय यह मध्य प्रदेश का शहर नहीं बल्कि मध्य भारत का शहर था और शिक्षा मंत्री मनोहर सिंह मेहता थे। शहर की मांग और बेहतर शिक्षा के लिए व्यक्तिगत रुचि के कारण उन्होंने ही एसजीएसआइटीएस, वैष्णव संस्थान, शासकीय ललित कला संस्थान आदि शैक्षणिक संस्थाओं को शासन से भूमि मुहैया कराई और प्राध्यापकों की नियुक्तियां करवाईं। वास्तव में शहर में बेहतर शिक्षा के प्रयास तभी से हो रहे हैं जो सतत जारी हैं। शहर के लोग भी शुरू से ही शिक्षा के लिए संवेदनशील और गंभीर रहे हैं जो यहां की एक और खूबी है।

जहां तक बात कला की है तो यह शहर शुरू से ही कला के लिए बाजार की भेंट नहीं चढ़ा। इसकी एक बड़ी वजह यहां के कलाकारों के स्वभाव में सादगी का शामिल होना है। यह उत्सव, उत्साह और सृजनात्मकता का शहर है। उद्योग-व्यवसाय की यहां कमी नहीं। हां यदि कुछ सुधार की गुंजाइश है तो वह यह कि यहां कला को उचित आर्थिक प्रतिसाद नहीं मिलता। यदि उद्योगपति, होटल, अस्पताल हर कलाकार की एक-दो कृति भी क्रय कर लें तो कलाकार को प्रोत्साहन मिलेगा। बाहर से आने वाले कलाकारों की नजर में शहर की अहमियत इस सकारात्मक रवैये की वजह से और भी बढ़ जाएगी जिसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ यहां की अर्थव्यवस्था और खूबसूरती पर भी पड़ेगा

मेरे मन की याद गली - 1986 में एक बार फिर ख्यात चित्रकार नारायण बेंद्रे आए। वे भालू मोंढ़े के घर ठहरे थे। वे भी इंदौर के ही थे। मैंने उनसे मेरी कलाकृतियां देखने को कहा तो बोले यहां ले आओ। मैंने कहा 250 से अधिक चित्र हैं यहां कैसे लाऊं। उन्होंने दूसरे दिन मेरे घर आने की रजामंदी दी और तय समय पर वे घर आ भी गए। सभी चित्रों को देख कहा कि इन्हें घर में क्यों रखा, मुंबई में जहांगीर आर्ट गैलरी में प्रदर्शित क्यों नहीं करते। उनसे पूछा कि कौन से चित्र प्रदर्शन योग्य हैं तो उन्होंने उनका भी चयन कर दिया।

Posted By: Hemraj Yadav

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