Naidunia Ke Sang Indore Ka Man : विवेक नागौरी। इंदौर के लोगों का मिजाज ही कुछ ऐसा है कि वे बहुत मिलनसार और हंसमुख हैं। यदि आप किसी अनजान से भी रास्ता पूछेंगे, तो वह इतनी आत्मीयता से बताएगा कि आपको लगेगा मानो उसके पास वक्त होता, तो वह आपको पते पर छोड़कर आता। अगर उसे रास्ता नहीं भी पता है, तो आस-पड़ोस से पूछकर बता देगा या मुस्कुराकर मना कर देगा, लेकिन ध्यान रखेगा कि उसके न कहने से सामने वाले का दिल न दुखे। यह मिलनसारिता और मदद की भावना ही इंदौर का दिलचस्प शहर बनाती है।

इंदौर में एक दौर था, जब यदि किसी की गाड़ी सामने चल रही किसी दूसरी गाड़ी से टकरा भी जाती, तो लोग लड़ते-झगड़ते नहीं थे, बल्कि यह पूछते थे कि आपको लगी तो नहीं? इसमें भी अपने से नुकसान की चिंता से ज्यादा दूसरे का ख्याल रखने की भावना थी। यद्यपि समय के साथ चीजें थोड़ी बदली हैं, फिर भी इंदौर ने अपनी इंदौरियत को काफी हद तक बचाकर रखा है।

देश के अन्य शहरों व महानगरों की अपेक्षा अपना इंदौर जितना स्वच्छ है, उतना ही शांत और मन का निर्मल भी है। मैंने इस शहर को बदलते हुए करीब से देखा है। एक दौर था, जब खानपान के ठीयों में सराफा ही रात में गुलजार रहा करता था। उस वक्त बाहर खानपान का ज्यादा चलन भी नहीं था, लेकिन अब मानो आधा शहर घर के बाहर ही खाना खाता है। रात में भी सराफा के अलावा कुछ और इलाके गुलजार होने लगे हैं। ़

शहर की तासीर में जो भी बड़े बदलाव हुए, वे बीते करीब दो दशक में हुए हैं। बावजूद इसके इंदौर ने अपने मूल मानवीय गुण नहीं छोड़े हैं। इंदौर का दायरा महानगरों की तरह लगातार बढ़ता गया, लेकिन इसका दिल छोटा नहीं हुआ। अब बस ट्रैफिक की बेतरतीबी ठीक हो व बार-बार तेज हार्न बजाने की आदत छूटे, तो इंदौर स्वर्ग हो जाए।

मेरे मन की याद गली - एक बार मेरी दुकान पर बाहरी पर्यटकों ने शिकंजी पीने के बाद आनलाइन भुगतान की बात कही। मेरे पास आनलाइन का विकल्प नहीं था, उनके पास नकद नहीं थे। वे असमंजस में थे कि तभी वहां खड़े इंदौरी परिवार ने उनके पैसे दे दिए। पर्यटकों ने पैसे लौटाने के लिए उनसे नंबर पूछा, तो परिवार ने कहा- आप इंदौर के मेहमान हैं। आपका आतिथ्य हमारा धर्म है। बाद में उन्हें मिठाई भी खिलाई ताकि वे मीठी यादें लेकर जाएं।

(लेखक नागौरी शिकंजी के संचालक हैं)

Posted By: Hemraj Yadav

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