Naidunia Ke Sang Indore Ka Man : डा. डीके तनेजा एमपीएम मेडिकल कालेज के पूर्व डीन। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में काम करने के बाद 12 अक्टूबर 1970 को मैं इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज में आया। जब यहां आया था, तो सोचता था कि इंदौर छोटा-सा शहर है और मैं ज्यादा दिन यहां नहीं रहूंगा। मगर इंदौर और इसका अपनापन ऐसा रास आया कि फिर मैं यहीं का होकर रह गया। वस्तुत: इंदौर शहर की आबोहवा व लोगों के प्रेम ने मुझे रोक लिया। तबसे अर्थात विगत 52 साल से मैं इंदौर में ही रह रहा हूं।

इंदौर में रुक जाने की एक मुख्य वजह यहां का सुहाना मौसम रहा। दिल्ली में ठंड भी कड़क और गर्मी भी बहुत तेज होती है। इस कारण मैं वहां हर साल बीमार हो जाता था। मगर जब इंदौर आया तो स्वस्थ रहने लगा। बारिश का मौसम भी इंदौर में मुझे स्वर्ग का अहसास करवाता था। जब मैं एमवाय अस्पताल में था, तब गांव के बड़े पटेल व कई ग्रामीण लोग उपचार करवाने आते थे। उन लोगों में मैंने आत्मीयता व प्रेम देखा। जिन लोगों से मेरे 52 साल पहले संबंध बने, वो आज भी कायम हैं। वे लोग आज भी निस्वार्थ व आत्मीयता से मिलते हैं। इंदौर में रुक जाने की दूसरी बड़ी वजह यहां के खाने का स्वाद रहा। पोहा, श्रीखंड व दाल-बाटी जैसे व्यंजन मैंने पहली बार इंदौर में ही खाए। वो जो स्वाद मुंह को लगा, वो आज तक कायम है।

1970 में इंदौर में एकमात्र अस्पताल एमवाय अस्पताल ही हुआ करता था। इसकी गरिमा इतनी थी कि आइएएस अफसर, कलेक्टर, मंत्री भी यहीं पर उपचार के लिए आते थे। 1987 में डा. गोकुलदास ने पहला निजी अस्पताल शुरू किया, उसके बाद ही शहर में मेडिकल सेवाओं का विस्तार शुरू हुआ। फिर एक के बाद एक कई नर्सिंग होम व अस्पताल बनते गए। आज यह स्थिति है कि इंदौर मेडिकल हब है और यहां 250 से ज्यादा अस्पताल हैं। जिन बीमारियों के उपचार के लिए लोग दिल्ली, मुंबई के चक्कर काटते थे, वो सभी इलाज इंदौर में हो रहे हैं। भारत में होने वाली हर तरह की सर्जरी अब इंदौर में हो रही है। हाल ही मुझे एक महिला मिली, जो उप्र के इटावा की रहने वाली हैं। वो सर्जरी के लिए दिल्ली या आगरा न जाते हुए इंदौर की बेहतर मेडिकल सेवाओं के लिए यहां आई।

मेरे मन की याद गली - मैंने एमवाय अस्पताल में हड्डी रोग विभाग का प्रमुख रहते हुए वर्ष 1994 में मध्य प्रदेश का पहला ट्रामा सेंटर बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए केंद्र सरकार से एक करोड़ रुपये स्वीकृत करवा लाया। मुझे इस बात की खुशी है कि इस सेंटर ने स्थापना से अब तक दुर्घटनाओं में घायल लाखों लोगों का जीवन बचाया है।

इंदौर कोई शहर नहीं बल्कि एक जादू है। यह मन को जीत लेता है। मैं दिल्ली से यहां आने के बाद वापस इसीलिए नहीं लौटा क्योंकि मेरे पास यहां बसने के हजार कारण थे। कुल मिलाकर इंदौर हर क्षेत्र में अद्भुत है।

Posted By: Hemraj Yadav

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