इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

एक वक्त था जब घरों में पुदीना, धनिया, मैथी या फलियों को सुखाकर उस मौसम में इस्तेमाल किया जाता था, जब उसकी पैदावार नहीं होती थी। अब इसे मशीनों के जरिए सुखाया जाने लगा है। शहर के युवा वरुण रहेजा ने नई तकनीक का इस्तेमाल कर एक खास सोलर ड्रायर बनाया है। इसके लिए उन्हें गुजरात की संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर नेटवर्किंग इकोलॉजी, एजुकेशन रि-इंटेग्रेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में डॉ.शिरिम गढ़िया सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 19 जून को दिया गया।

हाल ही में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले वरुण ने जनवरी में एक ऐसा सोलर ड्रायर बनाया, जिसका इस्तेमाल छोटे कृषक भी कर सकें। यूं तो बाजार में कई तरह के सोलर ड्रायर हैं, लेकिन इन्होंने नए ड्रायर को इस तरह डिजाइन किया है कि इसकी बनावट और लागत कम हो गई है। इसकी खासियत है कि आवश्यकता पड़ने पर इस ड्रायर को बड़ा भी किया जा सकता है।

इस तरह हुई लागत कम

वरुण बताते हैं कि आम तौर पर बाजार में जो सोलर ड्रायर उपलब्ध हैं, उनकी क्षमता और लागत दोनों ज्यादा है। 50 किलो की क्षमता वाले सोलर ड्रायर करीब 30 से 40 हजार रुपए के आते हैं। इससे कम उत्पाद करने वाले छोटे कृषक इसे उपयोग में लाने से कतराते हैं। मैंने जो सोलर ड्रायर डिजाइन किया है, उसकी क्षमता 20 किलो है और लागत करीब 8 हजार रुपए है। लागत कम करने के लिए इसकी डिजाइन में बदलाव किया है। ज्यादातर कलपुर्जे वे ही इस्तेमाल किए हैं, जो स्थानीय बाजार में उपलब्ध हैं। इसे फोल्डेबल बनाया है, ताकि ट्रांसपोर्टेशन में भी ज्यादा खर्च नहीं आए और कहीं भी ले जाना आसान हो । सोलर ड्रायर का फायदा यह है कि फल, सब्जी आदि को सुखाकर बाद में उपयोग लिया जा सकेगा और उसके पोषक तत्व, रंग और खुशबू बरकरार रहेगी। फसल के दाम नहीं मिलने पर किसान फसल फेंकने के बजाय इसका उपयोग कर सकेंगे, जिससे वे नुकसान से बच पाएंगे।

फोटोः वरूण के नाम से है।

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