- 'महिला दिवस' पर 'बरली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल वुमन' ने किया विशेष आयोजन

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

निर्भयता, सही समय पर उचित लक्ष्य का निर्धारण, दृढ़ आत्मविश्वास और लगातार सीखने की इच्छा जैसी आदतें हमें सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाती हैं। इस राह में महिला और पुरुष एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पूरक हैं। ये बात 'महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ' की चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर डॉली जोशी ने 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के मौके पर शुक्रवार सुबह 'बरली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल वुमन' द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में कही।

अक्षम महिलाओं और मानसिक रूप से दिव्यांगजन की मदद जरूरी

कार्यक्रम में बतौर अतिथि मौजूद 'सूरज निकेतन मानसिक दिव्यांग प्रशिक्षण एवं व्यवस्थापन केंद्र' की प्रमुख सीमा परिहार ने कहा कि महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में सक्षम महिलाओं को अक्षम महिलाओं के साथ-साथ मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की बेहतरी और उनमें आत्मसम्मान की भावना जागृत करने के प्रयास करना चाहिए। इस तरह ही उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है। 'ईवा वेलफेयर फाउंडेशन' की प्रमुख भारती मंडोले ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विवाह के बाद भी उन्होंने पढ़ाई का सपना पूरा किया। जिसके फलस्वरूप मात्र 10 महिलाओं से शुरू की गई उनकी कंपनी अब 800 महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही है।

महिलाओं को मिलें पुरुषों के समान शिक्षा और अवसर

बरली संस्थान की निदेशिका ताहेरा जाधव ने कहा कि यदि महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा और अवसर मिलें तो समाज में व्याप्त असमानता की समस्या पर बहुत आसानी से काबू पाया जा सकता है। सकारात्मक कार्य करने के लिए साहस और निर्णय क्षमता के विकास से स्त्री-पुरुष समानता का सपना साकार हो सकता है। इस मौके पर रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। जिसके तहत कलाकारों ने लघु नाटिका के मंचन के साथ गीत-संगीत और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में इंदौर के अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, सीहोर, बुरहानपुर, अलीराजपुर और झाबुआ जिले के 75 गांवों की 119 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन रेखा राठौर ने किया। आभार संस्थान के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. योगेश जाधव ने माना।

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