- हिंदी साहित्य समिति में लेखिका डॉ. वंदना अग्निहोत्री की किताब के विमोचन समारोह में ख्यात साहित्यकार डॉ. योगेंद्रनाथ शुक्ल का उद्बोधन

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

कमलेश्वर ने करीब 100 फिल्मों की पटकथा, कहानी और संवाद लिखे। 13 उपन्यास और तीन नाटकों के अलावा करीब 300 कहानियां लिखीं। इसके अलावा उन्होंने सात पत्रिकाओं का संपादन भी किया। उनकी किताब 'कितने पाकिस्तान' के एक के बाद एक प्रकाशित कई संस्करण तस्दीक करते हैं कि लेखक की समसामयिक मुद्दों पर पकड़ कितनी मजबूत थी। उनका रचना संसार हर मानक और हर कसौटी के लिहाज से अत्यंत समृद्ध है। ऐसे समृद्ध रचना संसार को एक पुस्तक में समाहित करने का काम बहुत दुरूह था। लेकिन लेखिका डॉ. वंदना अग्निहोत्री ने बड़ी कुशलता से इस मुश्किल काम को अत्यंत संतुलित तरीके से अंजाम दिया है। ये कहना है ख्यात साहित्यकार डॉ. योगेंद्रनाथ शुक्ल का। वे रविवार दोपहर हिंदी साहित्य समिति में लेखिका की कृति 'कमलेश्वर का रचना संसार' के विमोचन समारोह में संबोधित कर रहे थे।

विश्व कथा साहित्य में भारतीय कथा साहित्य का अहम योगदान

उन्होंने कहा कि विश्व कथा साहित्य के उद्भव में भारतीय कथा साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान है। छठे दशक में पंचतंत्र की कहानियों का ईरान ने पहलवी भाषा में अनुवाद किया। इसके बाद ग्रीक, अरबी, स्पेनिश, जर्मन और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में ये कहानियां अनुदित की गईं। इन अनुवादों का 19वीं सदी में यूरोप में शुरू हुई आधुनिक कहानी में स्पष्ट प्रभाव झलकता है। एक अन्य चर्चाकार डॉ. पद्मा सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र दुबे समेत अनेक साहित्य साधक एवं गणमान्यजन मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन गरिमा संजय दुबे ने किया।

(फोटो : आशू पटेल)