तीन दिनी ध्यानोत्सव के अंतिम दिन कराई प्रार्थना और ध्यान

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

'हे नाथ! तू ही मनुष्य जीवन का वास्तविक ध्येय है। हम अपनी इच्छाओं के गुलाम हैं, जो हमारी उन्नाति में बाधक है। तू ही एकमात्र ईश्वर एवं शक्ति है, जो हमें उस लक्ष्य तक ले जा सकता है।' यह उस प्रार्थना की पंक्तियां हैं, जो हमें मानव को जीवन के उच्चतम स्तर तक ले जा सकती है। बस आवश्यकता है इन पंक्तियों को समझने, उस पर मनन करने और परम सत्ता से जुड़कर सकारात्मकता की ओर अग्रसर होने की। सोने से पहले मानसिक रूप से 10 मिनट तक की जाने वाली इस प्रार्थना का महत्व, उसका अर्थ और अभ्यास कराकर ध्यान के बारे में जो समझाया गया, उसकी अनुभूति साधकों ने की। हार्टफुलनेस द्वारा आयोजित तीन दिनी ध्यानोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन प्रार्थना ध्यान कराया गया। प्रार्थना के माध्यम से हृदय से जुड़ने की यह साधना हजारों साधकों ने की। अभय प्रशाल में हुए इस आयोजन में सुबह पुलिसकर्मी और उनके परिजनों ने ध्यान लगाया व शाम को आम लोगों ने ध्यान की यह विधि जानी।

फोटोः आशु पटेल जी।