- गुजरे जमाने के श्रेष्ठ राजेंद्र कृष्ण की याद में संगीत कार्यक्रम का आयोजन

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा, जो फिल्म 'पड़ोसन' का 'इक चतुर नार करके सिंगार' गीत देख मुस्कुराया, खिलखिलाया न हो। लोग इस गीत में एक्ट करने वाले किशोर कुमार, महमूद, सुनील दत्त और सायरा बानो जैसे कलाकारों की उत्कृष्ट अदायगी के लिए दिल खोलकर तारीफ भी करते हैं। ये कहते भी नहीं थकते हैं कि इस गीत को मन्नााडे और किशोरदा ने क्या कमाल गाया है। बतौर संगीतकार उन्हें आरडी बर्मन भी याद आते हैं, लेकिन जब बात इस गीत को लिखने वाले गीतकार की हो तो उसका नाम भूल जाते हैं। फिल्म संगीत के एक्सपर्ट्स के अलावा बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस कालजयी गीत के गीतकार राजेंद्र कृष्ण हैं।

वही राजेंद्र कृष्ण जिन्होंने 'मेरे सामने वाली खिड़की में इक चांद का टुकड़ा रहता है, ये जिंदगी उसी की है जो किसी का हो गया, प्यार ही में खो गया, शाम ढले खिड़की तले तुम सीटी बजाना छोड़ दो, हम प्यार में जलने वालों को चैन कहां हाए... आराम कहां, चल उड़ जा रे पंछी के अब ये देस हुआ बेगाना, यू हसरतों के दाग मुहब्बत में धो लिए, भूली हुई यादों मुझे इतना न सताओ, इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा के मैं इक बादल आवारा, वो दिल कहां से लाऊं तेरी याद जो भुला दे, मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना' जैसे न जाने कितने गीतों से सिने संगीत को समृद्ध किया है। उनके गीत पुरानी पीढ़ी के साथ-साथ नई पीढ़ी भी गा रही है। बस उसे ये पता नहीं है कि इन अमर गीतों के रचयिता राजेंद्र कृष्ण हैं। करीब तीन दशक पहले इस महान गीतकार ने सिने संसार के साथ नश्वर दुनिया भी छोड़ दी, लेकिन उनके सैकड़ों सुकून भरे सार्थक बोलों से सजे गीतों के जरिए हम उनसे अब तक जुड़े हुए हैं।

'सोचा था प्यार हम ना करेंगे'

शब्दों के इसी धनी कलमकार को समर्पित था रविवार शाम जाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम 'ऐ दिल अब कहीं न जा'। जिसमें मुख्य स्वर रवि कुमार शर्मा, सुनील खोत, प्रदीप तपस्वी, एमके अनवर,मनीष शुक्ला, स्मिता पानसे और माला स्टीफन के थे। इन कलाकारों के गाए 'सोचा था प्यार हम ना करेंगे, दो घड़ी वो जो पास आ बैठे, इक मंजिल राही दो फिर प्यार न कैसे हो, तुम अकेले तो कभी बाग में जाया न करो, किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाए हुए' और 'ओ रात के मुसाफिर चंदा जरा बता दे' जैसे गीत खासतौर पर पसंद किए गए। संगीत संयोजन दीपेश जैन का था। उनके साथ संगत विजय राव (तबला), जयेंद्र रावल (ढोलक-कांगो) और अचिन जाधव (ऑक्टोपैड) ने की।

(फोटो : आशू पटेल)