इंदौर। मेक्रो से माइक्रो एवं माइक्रो के बाद अब नैनो का युग आ गया है। फॉरेंसिक विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में आज नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिसने साक्ष्य पहचानने में आने वाली मुश्किलों को आसान कर दिया है। यह जानकारी निजी यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक विभाग की प्राध्यापिका डॉ. स्वाति दुबे मिश्रा ने होलकर विज्ञान महाविद्यालय के फॉरेंसिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित फॉरेंसिक क्लब के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में दी। उन्होंने फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे फिंगरप्रिंटिग, विस्फोटक परीक्षण, डीएनए आदि में नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता को सहज ढंग से उदाहरण सहित समझाया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेश टी. सिलावट ने विषय की महत्ता को न्यायायिक विज्ञान के लिए बहुत उपयोगी बताया। उन्होंने हेल्पिंग-हैंड ग्रुप का भी उद्घाटन किया। इस ग्रुप द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्य जिसके अंतर्गत साक्षरता अभियान, यातायात व्यवस्था में पुलिस को सहयोग, वृद्धाश्रम में सेवा कार्य किए जाएंगे। प्रो.अंकेश अहिरवार, एवं प्रो. सतीश राय क्लब के संयोजक नियुक्त किए गए। कार्यक्रम का संचालन पिंकी हबलानी एवं अभिषेक जोशी ने किया।