- इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के सेमिनार में नगर निगम के सलाहकार अरशद वारसी ने 'वेस्ट टू वेल्थ' पर विचार रखे

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

कुछ साल पहले शहर के चौराहों और कॉलोनियों में कचरा पड़ा रहता था। खाली प्लॉट में लोग कचरा फेंक देते थे। अब देखिए कहीं कचरा दिखाई नहीं देता है। ऐसा शहरवासियों की एकजुटता से संभव हो पाया है। अब हम कोशिश कर रहे हैं होटल, रेस्टोरेंट और घरों से कम से कम कचरा निकले। इसके लिए ऐसी संस्थानों को जोड़ रहे हैं, जो बचा हुआ खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम करती हैं।

यह कहना है नगर निगम इंदौर के सलाहकार और ईको प्रो- एन्वायर्नमेंट सर्विसेस कंपनी के एमडी अरशद वारसी का। इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के इंदौर लोकल सेंटर द्वारा एसजीएसआईटीएस संस्थान में हुए सेमिनार में 'वेस्ट टू वेल्थ' पर बात हुई।

बायो सीएनजी से चल रही हैं 15 बसें

वारसी ने बताया शहर में 550 मैट्रिक टन गीला कचरा और 600 टन सूखा कचरा निकल रहा है। गीले कचरे से बनने वाली बायो सीएनजी से हमने 15-16 बसों को को चलाना भी शुरू कर दिया है। भविष्य में इसकी संख्या बढ़ेगी। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर रोजाना कचरे से 40 टन खाद बनाई जा रही है। शहर के 25 से 30 हजार घरों से तीन कंपनियां कचरा खरीद रही है। प्रक्रिया को एप से भी जोड़ा गया है। कंपनियां कचरे को रिसाइकल करती है। इससे नगर निगम का भी काफी पैसा बच रहा है। प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए बर्तन योजना शुरू की गई। बाजार में जाकर लोगों को भी समझाइश दी जा रही है। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी। एसजीएसआईटीएस के डायरेक्टर डॉ. आरके सक्सेना, सेंटर की चेयरपर्सन शिल्पा त्रिपाठी, डॉ. स्वर्णा तोरगल सहित कई सदस्य मौजूद थे।

नोट- फोटो फोल्डर में है। वेस्ट सेमिनार नाम से।