- प्रीतमलाल दुआ सभागार में संस्था 'कलाकृत' के बैनर तले इंदौर, भोपाल, धार और देवास के कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

रोशनी, रंगों और उमंगों का पांच दिनी दीपोत्सव जब दस्तक देता है तो चित्रकार की कूची भी कैनवास पर कल्पनाओं के चटख रंग बिखेर कर त्योहारों की अगवानी करने लगती है। कुछ ऐसे ही चित्रों से सजी है प्रीतमलाल दुआ आर्ट गैलरी में शनिवार से शुरू हुई दो दिनी कला प्रदर्शनी। संस्था 'कलाकृत' के बैनर तले इंदौर के अलावा भोपाल, धार और देवास के कलाकार भी इसमें अपने चित्र प्रदर्शित कर रहे हैं। उत्सवी माहौल के मद्देनजर इन चित्रों में भगवान शंकर, गणपति, कान्हा, श्रीराम, मां दुर्गा और गौतम बुद्ध के विविध रूपाकार खासतौर पर उकेरे गए हैं। इसी माहौल के दृष्टिगत धार्मिक चिन्हों एवं मंत्रों पर भी पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

कमाल का कॉफी वर्क

लेकिन ऐसा नहीं है कि प्रदर्शनी में केवल फेस्टिव मूड ही नजर आ रहा है। इसके अलावा भी दर्शकों के लिए यहां बहुत सी कलाकृतियां हैं। प्रदर्शनी की शुरुआत साक्षी सिंह के कमाल के कॉफी वर्क से होती है। जो कॉफी पीकर हम रिलैक्स हो जाते हैं उससे इतने सुंदर रुपाकार भी उकेरे जा सकते हैं, ये जानकर सुखद अनुभूति होती है। इसके अलावा युवाओं और बुजुर्गों के पोर्ट्रेट भी इस एक्जीबिशन को खास बनाते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों के चेहरे की झुर्रियां दर्शाने के लिए जिस बारीकी से काम किया गया है वो देखते ही बनता है।

तस्वीरों में झलकता मनोहारी ग्रामीण परिवेश

त्योहारों की तरंग के साथ-साथ कई चित्रकारों ने अपनी कल्पनाओं से कैनवास पर ग्रामीण परिवेश के मनोहारी रंग भी भरे हैं। इससे जुड़े निर्मला मुंडी और अनामिका के चित्र खासतौर पर उल्लेखनीय हैं। तूलिका जोशी की हाइपर रियलिस्टिक कृतियां वास्तविकता के बहुत नजदीक नजर आती हैं तो हर्षना रामटेके ने महज चार तस्वीरों के जरिए अपनी सोच के विस्तृत दायरे को बखूबी दर्शाया है। आदिनाथ त्रिपाठी द्वारा रची गई भोलेनाथ की पेंटिंग अनायास ही आकर्षित करती है तो शुभम की नारी शक्ति को विश्वमोहिनी के रूप में दर्शाने की अलहदा कोशिश भी काफी हद तक कामयाब रही है।

महिषासुर मर्दिनी और उड़ने को तैयार स्त्री

नुमाइश में प्रदर्शित ऋषिकेश मालवीय के पेंसिल स्केच परफेक्शन के बेहद नजदीक नजर आते हैं तो रीमा जैन का लता मंगेशकर जैसे पोर्ट्रेट भी लुभाते हैं। इसी मिजाज की किरण ठाकुर की पेंटिंग भी ध्यान खींचती है। जिसे बनाने के लिए उन्होंने एक्रेलिक कलर्स का इस्तेमाल किया है। अनमोल की महिषासुर मर्दिनी पेंटिंग के साथ नए आकाश में उड़ने को तैयार स्त्री की पेंटिंग भी आकर्षण का केंद्र है। भोपाल के ऋषभ निगम ने पेंसिल कलर से उम्दा कलाकारी की है तो आदेश ने बड़ी खूबसूरती से कैनवास पर क्ले के जरिए महामृत्युंजय मंत्र को उकेरा है। 20 साल के आर्टिस्ट आयुष ने चांदी के बरक और ग्लेटर पावडर से भगवान शंकर को बहुत खूबसूरती से चित्रित किया है।

सूर्यभान मरावी ने दिया लाइव डेमो

कृति जोशी, कनिष्का बैरागी, वर्षा सिरसिया, ऊषा मुछाल, किरण मुछाल, समीक्षा टोंग्या, अनिरुद्ध सिंह परिहार, अनिकेत सिंह परिहार, पलक मालपानी, पायल सेन, कनक खेड़े, अनिमेष सिंघई जैसे कलाकारों ने भी निराश नहीं किया है। एक्जीबिशन में उस वक्त एक नया रंग घुल गया जब कलाकार सूर्यभान मरावी ने लाइव डेमो देते हुए नए कलाकारों को चित्रकारी की बारीकियां सिखाईं।

(फोटो : राजू पंवार)