Shardiya Navratri 2022: रामकृष्ण मुले, इंदौर। इंदौर के पूर्वी और पश्चिम क्षेत्र में स्थित शक्ति के दो उपासना स्थल कई मायनों खास हैं। इसमें एक बिचौली मर्दाना स्थित वैष्णवधाम और दूसरा हरसिद्धि स्थित हरसिद्धि मंदिर है। पहले के निर्माण के बाद पूजन और संचालन की व्यवस्था के साथ जरूरतमंदों छात्रों की शिक्षा से लेकर बीमार की मदद की जिम्मेदारी सरकारी और गैर सरकारी सेक्टरों से जुड़ी महिलाएं उठा रही है। दूसरा प्राचीन मंदिरों में आठ पीढ़ियों से माता हरसिद्धि की आराधना की विरासत बेटी को दी जाती है। इसके बाद माता की पूजन बेटी-दामाद मिलकर करते हैं। जहां एक में भक्ति के साथ दिल में जरूरतमंदों की सेवा का भाव है तो दूसरे में बेटे को नहीं बल्कि बेटियों को उपासना का अधिकार दिया जा रहा है।

शिक्षा के साथ डायलिसिस और गंभीर बीमारियों के लिए करते हैं मदद

वैष्णवधाम मंदिर में मां दुर्गा, मां काली और मां सरस्वती की मनोहारी मूर्तियों की स्थापना 2004 में की गई थी। भूमि दान में मिलने के बाद मंदिर के निर्माण के लिए महिलाओं ने घर-घर जाकर भजन-कीर्तन से राशि एकत्रित की। तीन साल में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ। प्रतिष्ठा के लिए जयपुर से प्रतिमा लाई गई थी। मंदिर की जागृति मंडल से शुरुआती दौर में 100 महिलाएं जुड़ी थी जिनकी संख्या बढ़कर अब 2 हजार हो गई हैं।

संस्था की विनोद अहलूवालिया बताती हैं कि वर्तमान में 20 बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। मंदिर परिसर के एक हाल में लाइब्रेरी भी बनाई गई है। अब तक 200 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया गया है। एक परिवार के मुखिया की दोनों किडनी खराब हो गई थी। इसके बाद संस्था ने इलाज में सहयोग प्रदान किया। ऐसे कई मरीजों को उपचार में सहायता दी जाती है।

आठ पीढ़ि‍यों से बेटी-दामाद को मिल रहा मां हरसिद्धि की आराधना का अधिकार

हरसिद्धि मंदिर हरसिद्धि में आठ पीढ़ियों से माता हरसद्धि की आराधना का अधिकार बेटियों को दिया जा रहा है। होलकर ट्रस्ट द्वारा संचालित इस मंदिर में पूजन की जिम्मेदारी 1766 में वंशानुगत सनद द्वारा पं. जनार्दन भट्ट को सौंपी गई। उनके बाद यह जिम्मेदारी बेटों ने संभाली। इसके बाद तीसरी पीढ़ी से यह विरासत बेटियों को सौंपी जा रही है। बेटी और दामाद मिलकर ही माता की पूजा अर्चना कर रहे हैं। पं. सुनील शुक्ला बताते है कि उनकी भी दो बेटियां नित्या और आध्या है। माता की आराधना इनमें से कौन करेगा यह मां हरसिद्धि तय करेंगी। मंदिर में चतुर्भजी स्वरूप में महिषासुर मर्दनी हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर के गर्भगृह में सिद्ध दात्री और महालक्षमी भी अमृत कलश लिए हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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