Bato Bato Mein: बातों-बातों में, उदय प्रताप सिंह।

नगर निगम परिषद के सम्मेलन में इस बार कांग्रेस व भाजपा नेताओं के बीच शब्दों के बाण खूब चले। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने एनआरआइ सम्मेलन व समिट को दूल्हे को दिखाने के लिए बरात सजाना बताया। इस पर एमआइसी मेंबर राजेंद्र राठौर ने उन्हें दो टूक कहा कि 'छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं'। इससे साफ है कि निगम चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी चंदू शिंदे व भदौरिया के बीच हुए विवाद के बाद अभी तक दोनों ही गुटों के बीच रिश्ते सुलझे नहीं बल्कि और तल्ख हुए हैं। सम्मेलन के दौरान महापौर की जुबान फिसली और अंगुली करने की बात को उन्हें वापस लेना पड़ा। वहीं विधायक मेंदोला के मन में महाराज ही इस कदर छाए थे कि वे दो बार महापौर को महाराजजी बोल गए। हर बार की तरह बैठक में कांग्रेस पार्षद रुबीना खान ने अपने चुटीले अंदाज में बात करने के तरीके से सदन में बैठे सभी लोगों का ध्यान खींच ही लिया।

आखिर चुप कैसे रह गए सांसद महोदय

सांसद शंकर लालवानी जिस भी कार्यक्रम में जाएं उनके उद्बोधन के बगैर कार्यक्रम पूरा नहीं होता। किसी भी कार्यक्रम में टीम द्वारा उनकी ब्रांडिंग की पुरजोर कोशिश रहती है। निगम परिषद सम्मेलन में इस बार सांसद महोदय देरी से पहुंचे। बीच में सभापित ने उनका नाम पुकारा ताकि सांसदजी दो शब्द बोलें लेकिन पार्षदों के हंगामों की गूंज में उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिला। ऐसे में सांसद महोदय के लिए शायद यह पहला आयोजन होगा जिसमें उनकी उपस्थिति तो थी लेकिन उन्हें चुप्पी साधकर बैठे रहना पड़ा। सम्मेलन में सांसद पहुंचे तो उन्हें यह भी देखने का मौका मिल गया कि जिन नेत्रियों को उन्होंने पार्षद का टिकट दिलवाया है, पहले सम्मेलन में उनका परफार्मेंस कम तो नहीं रहा। नेत्रियां भी पीछे नहीं रहीं और उन्होंने सम्मेलन में माइक थाम अपनी बात पुरजोर तरीके से कही।

मंत्री के ओएसडी की कार का किराया एक लाख

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी बने एमजीएम मेडिकल कालेज के एक डेमांस्ट्रेटर का कालेज प्रबंधन विशेष ही ध्यान रख रहा है। ये ओएसडी साहब कालेज में छात्रों को पढ़ा भी नहीं रहे और भोपाल में मंत्रीजी की चाकरी कर रहे हैं। इसके बाद भी इन्हें मेडिकल कालेज द्वारा किराए की कार उपलब्ध करवाई गई है। इस कार का किराया ही हर माह का एक लाख रुपये जाता है। अब यह भी सोचने की बात है कि इंदौर से भोपाल आने-जाने में कितना पेट्रोल डीजल खर्च हो रहा है जो कि कालेज को एक लाख रुपये महीना किराया भरना पड़ रहा है। दबी जुबां लोग यह भी कह रहे हैं कि इतने में तो नई कार आ जाती है। सवाल यह है कि जब ओएसडी कालेज का काम नहीं कर रहे हैं तो उन्हें किस बात के लिए कार का किराया देकर उपकृत किया जा रहा।

'नो थू-थू' से अफसर-नेता परेशान

एनआरआइ सम्मेलन व इंवेस्टर्स समिट के पहले शहर में रंग-रोगन कर सड़कों, दीवारों को सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे गुटखा व पान खाने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। वो तो साफ सुथरे स्थानों पर भी थूक रहे हैं। इससे निजात दिलाने के लिए महापौर ने शहर में 'नो थू-थू अभियान" शुरू करवा दिया। इसमें महापौर व निगम के अफसरों को पीक साफ करने मैदान में उतरना पड़ा। इस अभियान से निगम के नेताजी और अफसर परेशान हो गए और कहने लगे कि क्या अब ये भी काम करना होगा। अभियान भी इस पूरे माह चलना है। सलाहकारों ने दोनों की नाराजगी महापौरजी को बताई। इसके बाद इस अभियान का रुख बदला और सप्ताह में सिर्फ एक ही दिन सफाई करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद निगम के नेताओं व अफसरों ने राहत की सांस ली।

Posted By: Sameer Deshpande

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