इंदौर। जमात-उल-मुजाहिद का आतंकी जहीरुल शेख उर्फ जाकिर दो वर्षों से ठिकाने बदलकर रह रहा था। जांच एजेंसियों से बचने के लिए वह मोबाइल का बहुत कम उपयोग करता था। एनआईए की टीम पांच दिन पूर्व पीछा करते हुए इंदौर पहुंची और सब्जी बेचने के बहाने ठेला लगाकर संकरी गलियों में रेकी की। जैसे ही जाकिर के आने-जाने और ठहरने की पुख्ता जानकारी हाथ लगी, उसे दबोच लिया। मंगलवार सुबह उसके घर में छानबीन की और मोबाइल व अन्य सामान जब्त कर लिया।

धमाकों की जांच कर रहे इंस्पेक्टर (एनआईए) दिवाकर मिश्रा शेख की चार साल से तलाश कर रहे थे। दो वर्ष पूर्व जानकारी मिली कि वह इंदौर में छिपा है। करीब दो महीने पूर्व उसके एक रिश्तेदार के मोबाइल में उसका भी नंबर मिला, लेकिन वह बार-बार लोकेशन बदल लेता था। कभी खंडवा रोड, नेमावर रोड और कभी आजाद नगर क्षेत्र में लोकेशन मिल रही थी। पांच दिन पूर्व मिश्रा की टीम इंदौर पहुंची और मीना पैलेस व कोहिनूर कॉलोनी में सब्जी का ठेला लगाकर शेख के रेकी करना शुरू की।

सोमवार को पता चला कि वह शाकिर खान के मकान में ठहरा हुआ है। यह मकान पश्चिम बंगाल निवासी महरुल मंडल ने किराए पर लिया है। मंडल मकान बनाने के ठेके लेता है। शेख उसके पास मजदूर बनकर छिपा है। ईद पर लोगों की आवाजाही देख एजेंसी ने उसे कोहिनूर कॉलोनी में नहीं पकड़ा और उसके पीछे-पीछे खंडवा रोड तक पहुंच गई। जैसे ही मौका मिला, उसे हिरासत में लेकर आजाद नगर थाने के सुपुर्द कर दिया।

कमरे में मिले गैंती, फावड़ा और करनी

एनआईए ने कार्रवाई में क्राइम ब्रांच एएसपी अमरेंद्र सिंह, एसआई बलरामसिंह तोमर की मदद ली। टीम ने मंगलवार सुबह ठेकेदार मंडल, मकान मालिक शाकिर और उनके जीजा अमजद के बयान लिए और कमरे में छानबीन की। यहां से गैंती, फावड़ा और करनी ही मिली।

महरुल के मुताबिक शेख मजदूरी करने आया था। एजेंसी ने पकड़ा, तब पता चला कि वह आतंकी घटना में वांछित है। मकान मालिक के मुताबिक मकान महरुल मंडल को किराए पर दिया था। इसकी थाने पर भी सूचना दी गई है। एनआईए अफसरों ने उनसे किराएदार की जानकारी और अनुबंध मांगा तो मुहैया करवा दिया। परिचित सुरेंद्र और अमजद के समक्ष शेख की गिरफ्तारी ली और उन्हें थाने से रवाना कर दिया।