इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। एक दिन मैं मार्शल आर्ट की प्रेक्टिस कर रहा था, वहां जैकी श्रॉफ भी बैठे हुए थे। थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे बच्चों को तुम ही मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देना। मैंने हामी भर ली और पूछा कि बच्चे कितने बड़े हैं। तब जैकी श्रॉफ का जवाब था कि अभी बच्चे हैं नहीं, लेकिन जब भी होंगे ट्रेनिंग तुम ही देना। दो साल बाद एक दिन फिर जैकी श्रॉफ मुझसे मिले और बोले... यह मेरा बेटा टाइगर है और इसे तुम्हें अपनी ही तरह बनाना है।

इस तरह करीब दो साल की उम्र से ही टाइगर को उन्होंने मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेने मेरे पास भेजना शुरू कर दिया। सीखने-सिखाने का यह सिलसिला 11 साल तक चलता रहा। आज टाइगर जिस मुकाम पर है, वह जैकी दादा की सोच, अपनी मेहनत और लगन की वजह से है। यह कहना है टाइगर श्रॉफ को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे चुके कोच निजामुद्दीन मुल्ला का, जो निजी कार्य से सोमवार को शहर आए हुए थे।

नईदुनिया ऑफिस आए निजामुद्दीन ने खास चर्चा में अपने जीवन, सेहत और टाइगर श्रॉफ से जुड़ी कई बातें कीं। कर्नाटक के बीजापुर से मुंबई तक का सफर तय करने वाले निजामुद्दीन 54 साल की उम्र में दोबारा बॉडी बिल्डिंग की तरफ रुख कर चुके हैं। इसकी वजह वे अपने शिष्य से मिली प्रेरणा को बताते हैं। वे कहते हैं टाइगर को मार्शल आर्ट सिखाने के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी बेशक उन पर थी, लेकिन अब जब शिष्य टाइगर कामयाब हो गया है तो अब वे मुझे उत्साहित कर रहे हैं। वे कहते हैं टाइगर को मिल रही सफलता के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं भी कुछ ऐसा करूं कि मेरी पहचान एक कोच से ज्यादा भी हो, इसलिए मैंने जिम जाना शुरू किया और मार्शल आर्ट के जरिए 2 साल में 25 मेडल (नेशनल और इंटरनेशनल) प्राप्त किए।

वक्त की जरूरत है मार्शल आर्ट

1987 से मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे निजामुद्दीन नौकरी के सिलसिले में मुंबई आए और फिर वहीं के होकर रह गए। वे बताते हैं कि 1989 में जीवन में बड़ा बदलाव तब आया, जब कंपनी ने मुझे मार्शल आर्ट की एडवांस ट्रेनिंग लेने मलेशिया भेजा और वहां से लौटकर मैंने अपनी क्लास शुरू की। यहीं मेरी मुलाकात जैकी श्रॉफ से हुई। बाद में मुझे आदित्य पंचोली, नसीरुद्दीन शाह के बच्चे, पूजा भट्ट के भाई आदि को मार्शल आर्ट सिखाने का मौका मिला। सिखाने के इस पूरे सफर में कई बार यह भी देखा कि कई बच्चे डरकर भाग गए तो कुछ ने मार्शल आर्ट को सिर्फ मनोरंजन के रूप में लिया, लेकिन मैं यही कहता हूं कि जीवन में पढ़ाई अगर जरूरी है तो खेल को भी साथ रखना जरूरी है। खेल शरीर की खुराक है और मार्शल आर्ट आने वाले वक्त की जरूरत, इसलिए मार्शल आर्ट तो सभी को सीखना चाहिए।

सबसे बेहतर है वेजिटेरियन डाइट

अकसर सेहत को लेकर लोग स्पेशल डाइट प्लान करते हैं। मैं यही मानता हूं कि आप उतना ही खाएं और वही खाएं जो आपके शरीर के अनुरूप हो। व्यक्तिगत रूप से मैं शाकाहार को प्राथमिकता देता हूं। रात को चावल व नॉनवेज कम खाना चाहिए और खाने में प्रोटीन ज्यादा होना चाहिए। अल्कोहल, स्मोकिंग, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और देर रात तक जागना शरीर के बड़े दुश्मन हैं।

मार्शल आर्ट से पहले मोटिवेशन जरूरी

लड़कियों या लड़कों दोनों के लिए ही मार्शल आर्ट सीखना जरूरी है। पर मार्शल आर्ट सीखने से पहले मोटिवेशन जरूरी है। लड़कियों को लड़ना सिखाना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें आत्मविश्वास और जोर से चिल्लाना सिखाएं। आवाज में दम होगा तो आधी समस्या अपने आप ही खत्म हो जाएगी।

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