इंदौर। कोई भी बच्चा जन्म से ही स्मार्ट या टैलेंटेड नहीं होता है। उसे सही देखभाल, मार्गदर्शन और प्यार से टैलेंटेड बनाया जाता है। कमजोर बच्चे को बुद्घू या नालायक कहना बिलकुल गलत है। कमी बच्चे में नहीं, बल्कि देखने वाले में है। जो उस खास बच्चे की खासियत को समझने के काबिल नहीं है। यह बात रविवार को डॉ. मानिका खन्नाा ने कही। वे तवलीन फाउंडेशन द्वारा प्रीतमलाल दुआ सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी। 'हाऊ मिस्टेक्स हेल्प यूअर ब्रेन ग्रो' विषय पर बोलते हुए मानिका ने कहा कि स्कूल में कई बार विशेष बच्चे को एडमिशन देने से इंकार कर दिया जाता है क्योंकि वह सामान्य बच्चों से अलग है।

जबकि हकीकत यह है कि हर बच्चे में कुछ खासियत होती है जिन्हें परखने की जरूरत होती है। व्यक्ति का दिमाग लगातार काम करता रहता है लेकिन कुछ दिन उपयोग बंद कर दिया जाए तो उसमें जंग लग जाएगा। ऐसा स्पेशल बच्चों के साथ होता है।

उन्हें खास तरीके से बातचीत, खेल, प्यार और तकनीकी तरीके से सामान्य जिंदगी दी जा सकती है। इस मौके पर एडीजीपी वरुण कपूर और इनकम टैक्स कमिश्नर संत सरन मंत्री बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। अतिथियों ने कहा कि हर बच्चा खास और दूसरे से अलग है। उनकी एक दूसरे से तुलना नहीं करना चाहिए। बच्चों को हमेशा सौ फीसदी नंबरों के आधार पर आंकने की बजाय उनमें मौजूद विशेषताओं पर आंकें।

जिंदगी की बड़ी गलती को खुद कागज पर लिखें

डॉ. राधिका मिसक्यूटा ने कहा कि गलती करने से डरना नहीं चाहिए बल्कि गलती करना अच्छा होता है। गलतियां ही इंसान को भविष्य में सही करने की प्रेरणा देती है। इंसान गलती करने के बाद ही सीखता है। व्यक्ति को हमेशा अपनी जिंदगी की बड़ी गलती को कागज पर लिखना चाहिए।

उसके बाद वह खुद ही समझ जाएगा कि आगे क्या करना है क्या नहीं। उन्होंने कहा कि बच्चे को उस तरीके से पढ़ाना चाहिए जो उनके लिए सर्वश्रेष्ठ है न कि जो हमें पसंद है। हर बच्चे की क्षमता के अनुसार उसका लेसन प्लान बनाना चाहिए। जब बच्चा अपनी पढ़ाई से प्यार करेगा वो सभी सफल हो सकेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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