इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पैरेंट्स-टीचर्स (पीटीएम) मीट की बात सुन सीधे स्कूल की तस्वीर आंखों के सामने उभरती है, जहां पैरेंट्स बच्चों की खूबियां और कमियां टीचर्स से जानते हैं और टीचर्स स्कूल से संबंधित बातों और जिज्ञासाओं को लेकर पैरेंट्स से सुझाव व समस्या साझा करते हैं। हां, कभी कॉलेज में पैरेंट्स-टीचर्स मीट के बारे में नहीं सुना गया। मगर शहर में एक कॉलेज ऐसा भी है, जहां स्टूडेंट्स के बेहतर कल के लिए यह पहल की गई है। सुनने में यह बात जरूर अटपटी लगती है, मगर हाल ही में ये पीटीएम हुई भी और इसमें पैरेंट्स ने शिरकत कर बच्चों के बारे में जानकारियां भी प्राप्त कीं और सुझाव भी दिए। खास बात यह है कि इसमें न केवल टीचर्स और पैरेंट्स रुचि ले रहे हैं, बल्कि स्टूडेंट्स भी इसे पसंद कर रहे हैं।

शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय में यह पहल सीड टेक्नोलॉजी और हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट ने की। इसके बाद इसे सभी विभागों में लागू करने की योजना है। पहली पीटीएम में करीब 15 विद्यार्थियों के पैरेंट्स ने भाग लिया और फैकल्टी से मुलाकात कर जाना कि बच्चे पढ़ाई, व्यवहार और अनुशासन में कितने खरे उतर रहे हैं।

शहर के बाहर रह रहे पैरेंट्स जान सकेंगे बच्चों के बारे में

विभागाध्यक्ष डॉ. किसलय पंचोली बताती हैं कि स्कूल में तो पीटीएम के जरिए पैरेंट्स बच्चों की हर बात जान लेते हैं, लेकिन कॉलेज में आने के बाद वे पढ़ाई, कॉलेज जाने की नियमितता, परेशानी या वहां मिलने वाली सुविधाओं को जान नहीं पाते। स्कूल लाइफ के बाद जब बच्चे कॉलेज में आते हैं तो वे खुद को बंधन रहित महसूस करते हैं और कई बार वे गलत रास्ता भी अपना लेते हैं। इसके अलावा अधिकांश विद्यार्थी शहर के बाहर के होते हैं और पैरेंट्स बच्चों के बारे में ज्यादा नहीं जान पाते। ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थियों की खूबी और कमी दोनों पैरेंट्स को पता चले। इसके अलावा टीचर्स भी यह जान सकें कि विद्यार्थियों को कॉलेज में क्या परेशानी है और पैरेंट्स क्या चाहते हैं। इस तरह न केवल शिक्षा में सुधार होगा, बल्कि टीचर्स, पैरेंट्स और स्टूडेंट्स तीनों में ही आपस में बेहतर बॉन्डिंग बन सकेगी।

सुझाव के साथ सुविधाओं के भी प्रयास

प्राध्यापक धर्मेंद्र जाट बताते हैं कि इस मीट से शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के बीच पारिवारिक माहौल बनेगा, जिससे पढ़ना-पढ़ाना और भी बेहतर ढंग से हो सकेगा। अभी जो पीटीएम हुई, इसमें कुछ ऐसे अभिभावक भी शामिल हुए, जो कृषि, पॉली हाउस या बीज उद्योग आदि संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इन अभिभावकों ने शिक्षा के क्षेत्र में हमें मदद करने को कहा है। यही नहीं पैरेंट्स ने इस पीटीएम को लेकर गंभीरता भी दिखाई और कहा कि टीचर्स पैरेंट्स का एक वाट्सएप ग्रुप बनाए, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों से संबंधित सूचना सीधे पैरेंट्स तक पहुंच जाए। जो अभिभावक वाट्सएप पर नहीं है, वे अपने निजी नंबर हमें देकर गए ताकि उनसे सीधे संवाद स्थापित किया जा सके।

हर तीन माह में होगी पीटीएम

जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष कलेक्टर लोकेश जाटव ने सुझाव दिया था कि विद्यार्थियों के रवैये से अभिभावकों को अवगत कराया जाए। इसके चलते हमने पीटीएम शुरू की। शुरुआत सीड टेक्नोलॉजी और हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से की, लेकिन अब इसे सभी विभागों में लागू किया जाएगा। अब हर क्लास के विद्यार्थियों की हर तीन माह में पीटीएम होगी। डॉ. सुरेश सिलावटप्राचार्य, शा. होलकर विज्ञान महाविद्यालय