Indore Mukesh Mangal Column: मुकेश मंगल, इंदौर, नईदुनिया। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के एडीजी विपिन माहेश्वरी ने जब से पुरानी फाइलें खंगालना शुरू की हैं, अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। विभिन्न जिलों में पदस्थ अफसर एडीजी का तोड़ ढूंढने में लगे हुए हैं। संगठित अपराधों की जांच के लिए गठित एसटीएफ की इंदौर इकाई कुछ साल पूर्व सिर्फ फर्जीवाड़े पर केंद्रित रही और अफसर जमीन, एडवाइजरी जैसे केसों में शुभ-लाभ करते रहे। जिन्हें विवेचना का अधिकार नहीं था, उन्होंने दूसरे अफसरों के नाम पर जांच आदेशित करवाई और लिखा-पढ़ी, पकड़ना-छोड़ना किसी दूसरे ने किया। जिनसे शुभ-लाभ हुआ उन्हें या तो केस से बाहर निकाल दिया या 173(8) में चालान पेश कर जमानत का रास्ता दिखा दिया। एडीजी ने उन सभी मामलों की फाइलें बुलवा लीं और जांच बैठा दी। जिनकी लिखा-पढ़ी फंस गई, एडीजी ने उनसे मुलजिमों की तरह घंटों तक बयान लिए और आरोप पत्र भी दे दिए।

ट्रैफिक एएसपी से क्यों परेशान हैं मातहत

यूं तो एएसपी अनिल पाटीदार शहर सुधारने के लिए इंदौर आए थे, लेकिन अफसरों ने उन्हें ट्रैफिक सुधार में लगा दिया। शुरुआत भले ही बेमन से हुई, लेकिन अब पाटीदार के नवाचारों की तारीफ होने लगी है। उन्होंने ट्रैफिक और ट्रैफिक वालों की नब्ज पर हाथ रख दिया। यही वजह है कि अब मातहत परेशान से रहने लगे हैं। धीमी शुरुआत और देर तक टिकने वाले पाटीदार के बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि वे भी ऐसा कर सकते हैं। पोस्टिंग के शुरुआती दिनों में उन्होंने जनता का विश्वास जीता और बाद में अफसरों की कारस्तानियां पकड़ीं। इशारों ही इशारों में सूबेदार से लेकर डीएसपी स्तर के अफसरों को बता दिया कि ट्रैफिक में कहां-कहां शुभ-लाभ की गुंजाइश है और कौन इस काम में लिप्त है, उन्हें सब पता है। बताया जाता है कि कुछ सूबेदार-टीआइ ने तो उनके सामने खुद ही सरेंडर कर दिया।

चौकी पर टीआइ का ताला, पुलिसवालों की नींद हराम

जब से एरोड्रम थाने में टीआइ संजय शुक्ला ने आमद दर्ज करवाई तब से पुलिसकर्मियों की नींद उड़ गई है। पुलिसकर्मियों की नब्ज से वाकिफ शुक्ला ने आरामगाह पर ही ताला जो जड़ दिया है। खबर मिली थी कि जो जवान थाने से रात्रि गश्त के लिए रवाना होते हैं, वे संगम नगर चौकी पर जाकर सो जाते हैं। थाने की गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर भी भ्रमण का बहाना बनाकर चौकी में खर्राटे भरता है। इसके बाद टीआइ ने आदेश जारी कर रात दस बजे न सिर्फ चौकी पर ताला लगवाना शुरू कर दिया, बल्कि चाबी थाने में जमा कर प्रतिदिन की रिपोर्ट भी लेनी शुरू कर दी। शुक्ला इसके पहले छोटी ग्वालटोली थाने में पदस्थ रहे हैं। वहां भी जवान चौकी का आराम फरमाने में ही उपयोग करते हैं। आराम बंद होने के बाद चोरियां तो रुकी ही क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ गई है।

फर्जी मैसेज बंद होने से परेशान पुलिसवाले

पूर्वी क्षेत्र के एसपी आशुतोष बागरी ने जब से फर्जी मैसेज चलाने वालों पर शिकंजा कसा, तब से पुलिसवाले काफी परेशान हैं। दरअसल एक दूसरे के थानों की पोल खोलने वाले कुछ पुलिसकर्मी-टीआइ ही इंटरनेट मीडिया पर मैसेज सर्कुलेट करवाते थे। गुड लिस्ट में शामिल कुछ लोग 'प्लीज चेक" लिखकर बगैर पुष्टि के मैसेज चला देते थे। पिछले सप्ताह इसी तरह के एक मैसेज ने विजय नगर और एमआइजी थाने की रात काली कर दी। गुस्साए एसपी ने पहले तो केस दर्ज करवाया बाद में एडमिन और मैसेज चलाने वालों को नोटिस जारी करवा दिया। कार्रवाई के बाद खबरी पुलिसकर्मी पसोपेश में है। पड़ोसी थाने में बड़ी घटना हुई है। थाने में रिपोर्ट ही नहीं लिखी। इस तरह उकसा कर मैसेज चलवाने वाले पुलिसकर्मी परेशान हैं। एसपी की इस मुहिम से थाना प्रभारी तो सुकून में हैं ही, वे मीडियाकर्मी भी खुश हैं जिन्हें परेशान होना पड़ता था।

Posted By: Sameer Deshpande

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