उदय प्रताप सिंह, इंदौर Organ Donation In Indore। डेंटल सर्जन डा. संगीता पाटिल की बेटी निहारिका ने मां के अंगों को दान करने का निर्णय लिया। डा. संगीता की एक किडनी चोइथराम अस्पताल में डिंडोरी (शाहपुरा) के 32 वर्षीय युवक को लगाई गई। वहां मौजूद युवक की मां ने बताया कि उनका बेटा पिछले 13-14 साल से डायलिसिस पर है। डेढ़ साल पहले उसकी बहन ने उसे एक किडनी डोनेट की थी, लेकिन ट्रांसप्लांट ज्यादा सफल नहीं रहा और युवक को पुन: डायलिसिस की जरूरत पड़ी।

अब डा. संगीता की किडनी बेटे को मिलने से उन्हें बेटे के बेहतर जीवन की आस जगी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि इंदौर में बेटे का किडनी ट्रांसप्लांट होना है तो वो 14 सितंबर को ही बेटे को लेकर चली आईं। उन्होंने बताया कि पति को चलने में दिक्कत है, इस वजह से वो नहीं आ सके। उन्होंने डा. संगीता की बेटी व स्वजन को धन्यवाद भी दिया।

तकनीकी कारणों से लिवर और किडनी निकालने में लगा ज्यादा समय

डा. संगीता पाटिल के स्वजन ने जब उनके अंग दान करने का निर्णय लिया तो इसके बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। चोइथराम अस्पताल में गुरुवार दोपहर 3 बजे तक भोपाल के बंसल अस्पताल के डा. गुरु सिंग व उनकी टीम पहुंची। इसके बाद करीब शाम 5 बजे बाद अस्पताल के ओटी में ब्रेनडेड डा. संगीता का शरीर लाया गया। इसके बाद चोइथराम अस्पताल के डा. सुदेश शारदा के साथ मिलकर भोपाल की चिकित्सकों की टीम ने लिवर व दोनों किडनियों को निकाला। टीम से जुड़े डाक्टरों के मुताबिक तकनीकी कारणों से किडनी व लिवर निकालने में दो घंटे से ज्यादा समय लगा।

निहारिका से मिले संभागायुक्त

चोइथराम अस्पताल में संभागायुक्त डा. पवन शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि इंदौर में जल्द ही बोन बैंक भी शुरू करें ताकि ज्यादा मरीजों को इसका लाभ मिल सके। वे डा. संगीता की बेटी निहारिका से भी मिले। निहारिका ने उन्हें मां के साथ हुई वारदात की जानकारी दी। निहारिका ने कहा कि हमने विजयनगर थाने में शिकायत की है। इस मामले में संभागायुक्त ने वहां मौजूद पुलिसकर्मी से पूछा कि आखिर इस मामले में अब तक क्या हुआ है, यह बताएं। डाक्टर संगीता के दो भाई भी मुुंबई से इंदौर आए थे। उनमें से एक ने संभागायुक्त से चर्चा भी की।

दो ब्रेनडेथ के अलर्ट और मिले

गुरुवार को हमें दो मरीजों के ब्रेनडेथ होने के अलर्ट मिले हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर में और अंगदान होगा। कोविड काल में भी इंदौर में अंगदान की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से संपन्ना किया गया। इस दौरान कोविड प्रोटोकाल का भी पूरी तरह पालन किया गया। जिस मरीज के अंग दान किए गए उसकी एंडोट्रेंकियल तरीके से गले से कोविड संक्रमण की जांच का सैंपल लिया है। जिन मरीजों को अंग लगाए गए उनकी भी आरटीपीसीआर जांच की गई। ऐसे में अंगदान करना इस स्थिति में भी पूर्णरूप से सुरक्षित है।

-डा. संजय दीक्षित, डीन एमजीएम मेडिकल कालेज

Posted By: Sameer Deshpande

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