Hello Doctor Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दांतों की बीमारियों को हम खुद हमारी लापरवाही से बुलाते हैं। सही तरीके से ब्रश किया जाए तो दांतों की बीमारियों से बचा जा सकता है लेकिन सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ही सही तरीके से ब्रश करते हैं। दरअसल लोगों को पता नहीं होता कि ब्रश करना कैसे है। दांतों की सुंदरता को लेकर जागरूकता बढ़ी है। किसी समय पांच से सात प्रतिशत लोग ही दंत चिकित्सक के पास पहुंचते थे लेकिन अब यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। बचपन से ही बच्चों को सही तरीके से और दिन में कम से कम दो बार ब्रश करने की आदत डाल दी जाए तो उन्हें दांत के डाक्टर के पास जाना ही नहीं पड़ेगा।

यह बात वरिष्ठ दंत चिकित्सक और शासकीय दंत चिकित्सालय के प्राचार्य डा.देशराज जैन ने कही। वे बुधवार को नईदुनिया के साप्ताहिक कार्यक्रम हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों के जवाब दे रहे थे। डा. जैन ने दांतों की देखभाल और बीमारियों के बारे में कई बातें पाठकों को बताई। उन्होंने दांतों की बीमारियों की अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी। डा.जैन ने पाठकों को बताया कि शासकीय दंत चिकित्सालय में कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुविधाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

- छह माह की उम्र में बच्चों के दूध के दांत आना शुरू हो जाते हैं। इस उम्र से ही बच्चों को दूध के अलावा दलिया, दाल-चांवल दें। बच्चे का मुंह चलेगा तो उसके जबड़े मजबूत होंगे

- माताओं को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को कुछ भी खिलाने-पिलाने के बाद पानी जरूर पिलाएं

- 10 माह की उम्र से ही बच्चों को ब्रश करने की आदत डालें। बच्चों के लिए विशेष ब्रश आते हैं जो मुलायम होते हैं

- पहले लोग खड़ा अनाज खाते थे इससे जबड़े की मासपेशियां मजबूत होती थी और मसूड़ों की हड्डियां विकसित होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। जबड़ा ही विकसित नहीं होगा तो हड्डी कैसे मजबूत बनेगी।

अक्कल दाढ़ का अक्ल से कोई लेना-देना नहीं

- दूध के दांत स्थाई दांत के लिए सिर्फ जगह रोकने का काम करते हैं। छह साल की उम्र तक दूध के दांत टूटना शुरू हो जाते हैं।

- पहली दाढ़ छह साल की उम्र में, दूसरी 12 साल की उम्र में और तीसरी दाढ़ 18 साल की उम्र के बाद आती है। यही वजह है कि तीसरी दाढ़ को अक्कल दाढ़ कहते हैं लेकिन इसका अक्ल से कोई लेना-देना नहीं है

इन बातों का रखें ध्यान

-दिन में दो बार नियमित ब्रश करें। रात को सोने से पहले ब्रश करना जरूरी है। रात को ब्रश करके सोने की आदत आपको दांतों की कई बीमारियों से बचाती है।

-ब्रश को मसूड़े पर रखें और फिर ऊपर की तरफ ले जाएं। इससे दांत और मसूडों के बीच फंसा खाना बाहर निकल जाएगा। दांतों के भीतर भी इसी तरह से ब्रश करें। इससे मसूड़े दांतों से चिपकेंगे।

-खड़े अनाज का सेवन करें। भुट्टे, ककड़ी, अमरूद, नारियल जैसे फलों का सेवना करें ताकि

-जिन्हें पायरिया है उन्हें भ्रांति होती है कि तंबाकू खाने से पायरिया ठीक हो रहा है लेकिन ऐसा होता नहीं। दरअसल लगातार तंबाकू खाने से तंबाकू दांतों पर जमा होने लगती है। इसकी वजह से हुआ हल्का नशा बीमारी का अहसास नहीं होने देता, लेकिन बीमारी खत्म या ठीक नहीं करता। पायरिया के बावजूद तंबाकू का सेवन करने पर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

दांत में कीड़ा लगने का मतलब

दांत की बाहरी परत सबसे ज्यादा मजबूत होती है। खाने के बाद ब्रश नहीं करने से खाना दांत की परत पर जमा हो जाता है। इस खाने पर बैक्टेरिया जमा हो जाते हैं। ये बैक्टेरियां अम्ल बनाते हैं। धीरे-धीरे अम्ल की वजह से दांतों का कैल्शियम घूलने लगता है। कुछ दिनों में दांत पर एक छोटा छेद नजर आने लगता है। छेद समय के साथ गहराने लगता है और फिर पहले भूरा और फिर काला हो जाता है। इसी को दांत में कीड़ा लगना कहा जाता है।

यह होता है पायरिया

-दांत और मसूड़ों के बीच खाना फंसने से पायरिया की शुरुआत होती है। पहले चरण में केवल मसूडों पर सूजन आती है। ध्यान नहीं देने पर मसूड़ों की हड्डी कमजोर होने लगती है। इस पर भी लापरवाही बरती जाए तो दांत कमजोर होने लगते हैं। दांतों में पस पड़ने लगता है और मुंह से बदबू आने लगती है।

सवाल-जवाब

सवाल - मेरी उम्र 64 साल है। मेरी दाढ में रूक-रूककर दर्द होता है। -राजू अग्रवाल, देवास

जवाब - आप दिन में दो-तीन बार गर्म पानी के कुल्ले करें। ब्रश सही तरीके से करें। कई बार दांत और मसूड़े के बीच खाना फंस जाता है। सही तरीके से ब्रश करेंगे तो आराम पड़ेगा।

सवाल - 40 की उम्र के बाद ज्यादातर लोगों के दांत कमजोर हो जाते है। हम क्या करें। -अनिल, देवास

जवाब - भगवान ने दांत जीवनभर के लिए दिए हैं। दांत की बीमारी सिर्फ हमारी लापरवाही से होती है। विज्ञानी तरीके से ब्रश करें। दांत की सफाई ही मजबूती का आधार है। वैज्ञानिक तरीके से करें। मुलायम ब्रश लें।

सवाल - क्या मधुमेह की वजह से दांत कमजोर हो जाते हैं। -असलम, देवास

जवाब - यह बात सही है। मधुमेह के मरीजों को अपना शुगर नियंत्रित रखना चाहिए। शुगर बढ़ने पर बैक्टेरिया बढ़ जाते हैं। ये मसूड़े की हड्डी गलाने लगते हैं। इससे दांत कमजोर हो जाते हैं। ऐसे मरीज को तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वर्तमान में कमजोर दांतों का इलाज उपलब्ध है।

सवाल - मुझे कुछ भी खाते वक्त दांतों में दर्द होता है। -राजू शर्मा, इंदौर

जवाब - हो सकता है आपके दांत में कीड़ा लग गया हो या आपको पायरिया हो रहा हो। आप फिलहाल दर्द निवारक दवाई लेकर तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करें।

सवाल - बेटी की उम्र 25 साल है। उसके दांतों में तेड़ापन है। नीचे की दाढ़ नहीं आ रही। -सुनील तिवारी

जवाब - बेटी को तार बांधे जा सकते हैं। आजकल ऐसे तार भी उपलब्ध हैं जो दांत के कलर के होते हैं। जो दांत या दाढ़ नहीं आ रही है उसका एक्स-रे करवाएं। अब ऐसी तकनीक भी है कि ऐसे दांत या दाढ़ को बाहर लाया जा सके।

सवाल - मैंने कुछ समय पहले रूट कैनाल करवाया था। अब दोबारा दर्द हो रहा है। डाक्टर का कहना है दाढ़ निकालना पड़ेगी। -प्रकाश त्रिवेदी

जवाब - रूट कैनाल के बाद भी इंफेक्शन होता है तो दोबारा रूट कैनाल की जा सकती है। विशेषज्ञ से संपर्क करें।

सवाल - 80 साल उम्र है। मेरे सभी दांत सलामत हैं। कुछ दिनों से मुझे लग रहा है कि मेरे दांतों में पोचापन आ गया है। -सज्जन कुमार गर्ग

जवाब - उम्र के हिसाब से दांत घीस जाते हैं। आप दांतों का एक्स-रे निकलवाएं। इससे स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सवाल - मेरे दांत बहुत धारदार हो गए हैं। -भेरूलाल कुमावत

जवाब - ऐसे दांतों पर कैप चढ़ाई जा सकती है या इन्हें घीसकर गोल किया जा सकता है।

सवाल - मुझे कान में दर्द है। क्या इसका संबंध दांत से हो सकता है - श्वेता जैन

जवाब - दांत और जबड़ों का कान से संबंध होता है। कई बार दांत के कारण कान की नसों में दिक्कत आती है।

Posted By: Sameer Deshpande

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