*शंकराचार्य मठ के प्रभारी डॉ. गिरीशानंद महाराज ने प्रवचनमाला में कहा

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। निर्गुण ब्रह्म ही भक्तों के लिए साकार स्वरूप धारण करते हैं। श्रीराम के सत्य स्वरूप होने से ही यह जगत सत्य नहीं होने पर भी सत्य जैसा दिखाई पड़ता है। ठीक उसी तरह, जैसे कोई बड़ा अरबपति आदमी यदि नकली सोने की चेन पहन लेता है तो लोग उसे असली समझ लेते हैं। गरीब असली पहन ले तो लोग उसे नकली समझ लेते हैं।

यह बात शंकराचार्य मठ के प्रभारी डॉ. गिरीशानंद महाराज ने शुक्रवार को एरोड्रम रोड स्थित शंकराचार्य मठ पर कही। वे श्रीराम चरित्र पर आयोजित प्रवचनमाला में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसी तरह इस मिथ्या संसार को रामजी ने अपने गले में धारण कर रखा है। इसके कारण हम को यह सत्य सा लगता है। सनातन धर्म में देव अनेक लेकिन ईश्वर एक है। भक्तों की इच्छा के कारण निराकार ईश्वर साकार रूप धारण करता है। धनुष-बाण हाथ में होता है तो लोग रामजी कहते हैं। हाथ में बांसुरी हो तो लोग मुरलीधर कहते हैं। भगवान को किसी स्वरूप-श्रृंगार की आवश्यकता नहीं होती। वे तो अपने भक्तों की इच्छा के कारण स्वरूप और श्रृंगार ग्रहण करते हैं। ईश्वर कहते हैं कि मैं भक्तों के वश में हूं। भक्तों के कल्याण के लिए भगवान सगुण रूप में अवतार लेकर अनेक प्रकार की लीला करते हैं। निराकार भगवान न किसी को मारते हैं और न ही तारते हैं। मारने और तारने का काम तो श्रीराम और श्रीकृष्ण करते हैं। इसलिए कलियुग में नाम का विशेष प्रभाव है। भगवान का नाम लेने से व्यक्ति का कल्याण होता है। भक्तों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रवचन का लाभ लिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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