इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। समग्र शिक्षा अभियान की समावेशित शिक्षा योजना के अंतर्गत जिला शिक्षा केंद्र इंदौर के समस्त विकासखंडों के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांगजन) का उन्मुखीकरण दिनांक 23 एवं 24 नवंबर को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) इंदौर में किया गया, जिसमें 125 अभिभावकों को दिव्यांगता के क्षेत्र में शासन द्वारा प्रदाय की जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान कि गई।

जिला शिक्षा केंद्र के जिला परियोजना समन्वयक अक्षय सिंह राठौर द्वारा दिव्यांग बच्चों हेतु जिले में किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों में कोई एक कमी के बदले में उनमें अनेक खूबियों का समावेश हो जाता है। हमें उन्हें पहचान कर निखारने की आवश्यकता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की वरिष्ठ व्याख्याता एवं समावेशित शिक्षा प्रभारी राजकुमारी सिलावट ने सभी प्रकार की दिव्यांगताओं के बच्चों को समावेशित शिक्षा अंतर्गत सामान्य शालाओं में किस प्रकार से समायोजित किया जाए, इस पर महत्त्वपूर्ण जानकारी दी।

जिला शिक्षा केंद्र के सहायक परियोजना समन्वयक (समावेशित शिक्षा) आबिद अली द्वारा अभिभावकों को निःशक्त व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत दिव्यांगों के अधिकार, सुरक्षा, एवं संरक्षण संबंधी प्रविधानों के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।

जिले के विभिन्न विकासखंडों में दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण हेतु कार्यरत मोबाइल स्रोत सलाहकार पार्वती करोरिया (महु) दवारा दृष्टिबाधित बच्चों के अध्ययन अध्यापन में आने वाली समस्याओं एवं उनके निराकरण पर प्रकाश डाला। अंजली मेंडके (महु) द्वारा दिव्यांगता के कारण एवं उनसे बचने के उपायों सम्बन्धी जानकारी प्रदान की गई। विकासखंड इंदौर 1 में कार्यरत संगीता खिल्लारे द्वारा दिव्यांग बच्चों को शिक्षा विभाग एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई।

इंदौर ग्रामीण से निकिता जोशी द्वारा दिव्यांगताओं के विषय में समाज में फैली गलत धारणाओं एवं वास्तविकता से अभिभावकों का परिचय कराया। विकासखंड सांवेर से शदीपिका पटेल द्वारा सेरिब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के उपचार, देखभाल एवं उनमें संवेदनशीलता विकसित करने हेतु प्रशिक्षण संबंधी प्रयोग अभिभावकों को सिखाए।देपालपुर से योगेश उमड़ेकर एवं बशीर नागोरी द्वारा दिव्यांग बच्चों की गृह आधारित शिक्षा, चुनौतियां, समस्याएं एवं समाधान के विषय में अभिभावकों को अवगत कराया। साथ ही ऐसे दिव्यांग बच्चों के विषय में जानकारी प्रदान की जो दिव्यांगता से पीड़ित होने के पश्चात भी सामाजिक जीवन में सफल हैं एवं दूसरे लोगों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते है।

Posted By: Sameer Deshpande

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