इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सीढ़ी ऊपर भी ले जाती और नीचे भी ले आती है। हम कहां जाएंगे, हम अपना जीवन सफल बनाएंगे या व्यर्थ गंवाएंगे इसका निर्धारण हमारे द्वारा तय किए गए मार्ग और हमारी नियत पर ही निर्भर करता है। इसलिए आप जो बनना चाहते हैं उसके लिए मार्ग सोच समझकर चुनें। यह बात वाराणसी एयरपोर्ट की निदेशक अर्यमा सान्याल ने पाठक संसद में कही।

शहर में बिते दिनों शासकीय श्री अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय एवं हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में पाठक संसद आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत अनिल त्रिवेदी ने जीवन का फलसफा समझाती स्वरचित गजल ‘कौन जाने ये पल कल मिले न मिले, हंसते मुस्कुराते हुए जिंदगी तू अपनी जी ले’ सुनाकर की। इसके बाद संतोष मोहंती ने ‘वो जो सदैव चला करते हैं कर्तव्य पथ पर मानवता उपकृत हो जाती बन जाते वे जग में दिनकर’ कविता सुनाई। देवेंद्र सिंह सिसौदिया ने रिश्तों की अहमियत समझाती कविता पेश की तो हरेराम वाजपेयी ने कविता ‘कुछ गीत लिखे हैं मैंने, धरती से मिले हैं आकाश से उतरकर’ सुनाई।

प्रभु त्रिवेदी ने दोहे सुनाए। इस अवसर पर सदाशिव कौतुक, रामचंद्र दुबे, हरीश शर्मा, मोहन मातवानी, दिनेशचंद तिवारी, ओम उपाध्याय, रमेश जैन राही, भीमसिंह पंवार, सत्यनारायण मंगल, नयन राठी, आशा जाकड़, डा. शशि निगम, मुकेश इंदौरी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। आयोजन की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी पद्मश्री डा. जनक पलटा ने ‘कर्म ही देंगे तुझे अलग पहचान, हर पल संघर्ष कर बन तू महान’ पंक्तियां सुनाई। इस अवसर पर लेखक गायत्री प्रसाद शुक्ला की कृति सत्यम शिवम सुन्दरम का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम में बाबू भाई महिदपुर वाले विशेष रूप से उपस्थित थे। अतिथि स्वागत ग्रंथपाल लीली डावर ने किया। आभार इंदौर पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष डा. जीडी अग्रवाल ने माना।

Posted By: Sameer Deshpande

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