Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हुकमचंद मिल की जमीन को लेकर नगर निगम द्वारा हाई कोर्ट में प्रस्तुत एक आवेदन ने मिल के पांच हजार से ज्यादा मजदूरों को आक्रोशित कर दिया है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि नगर निगम और शासन ने उनका बकाया भुगतान शीघ्र नहीं किया तो वे आंदोलन करेंगे। रविवार को मिल के गेट पर हुई मजदूरों की साप्ताहिक बैठक में इस पर चर्चा हुई। बैठक में बड़ी संख्या में मजदूर उपस्थित थे।

गौरतलब है कि दिसंबर 1991 से हुकमचंद मिल बंद है। मिल के पांच हजार से ज्यादा मजदूर अपनी बकाया रकम के लिए सालों से न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं। कोर्ट ने सालों पहले आदेश दिया था कि मिल की जमीन बेचकर मजदूरों का भुगतान किया जाए लेकिन मिल की जमीन नहीं बिकने से मजदूरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जमीन आसानी से और अच्छे दाम पर बिक सके इसके लिए मिल की जमीन का भूमि उपयोग भी बदला गया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

डीआरटी ने आठ बार इस संबंध में निविदाएं भी आमंत्रित की लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया। 12 मार्च 2022 को कोर्ट ने आदेश दिया था कि एक बार फिर मिल की जमीन को बेचने का प्रयास तेज किया जाए और कोशिश की जाए कि जमीन शीघ्र बेची जाए ताकि मजदूरों को उनका हक मिल सके। मजदूर नेता हरनामसिंह धालीवाल ने बताया कि नगर निगम ने इस आदेश को लेकर हाई कोर्ट में एक आवेदन दिया है। इसमें मिल की जमीन बेचने पर रोक लगाने की मांग की गई है। मजदूरों में इसे लेकर आक्रोश है।

मजदूरों का कहना है कि उन्हें मिल की जमीन से कोई लेना देना नहीं है। वे तो सिर्फ यह चाहते हैं कि उन्हें उनका बकाया भुगतान किया जाए। यह पैसा जमीन बेचकर दिया जाए या और किसी मद से। मिल के गेट पर होने वाली साप्ताहिक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि मजदूरों को उनका भुगतान शीघ्र नहीं मिला तो वे आंदोलन करेंगे।

Posted By: Sameer Deshpande

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