Health Tips: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बच्चों के खाने की आदतें अधिकांश माता-पिताओं के चिंता का कारण है, जिसकी वजह से बच्चों को खिलाने के लिए कई बार उनके माता-पिता सख्त रूख अपनाते हैं और अपने बच्चों पर खाने के लिए दबाव डालते हैं। दुर्भाग्य से, यह गलती वास्तव में बिल्कुल विपरीत प्रभाव डालती है और इसकी वजह से बच्चे की खाने में रुचि पूरी तरह से समाप्त हो सकती हैं।

बाल रोग विषेषज्ञ डा. अनुराग जैन के अनुसार बच्चों पर अधिक दबाव बनाना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। बच्चों के खाने की आदतों को लेकर माता-पिता बहुत अधिक चिंतित रहते है और वे भूल जाते हैं कि भोजन करना एक आनंदायक प्रक्रिया है। धमकी देकर अथवा डर दिखाकर बच्चों को खाने के लिए मजबूर करने से उनमें विभिन्न तरह की अस्वास्थ्यकर खाने की आदतें विकसित हो सकती है। एक और गलती जो माता-पिता करते हैं, वह है बच्चे का पेट भर जाने पर भी उसे खाने के लिए मजबूर करना।

रोज भोजन में बच्चों को नहीं दे नमकीन

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है पेट भर जाने के बाद बच्चें भोजन से दूर होना शुरू कर देते हैं अथवा अतिरिक्त भोजन को थूक देते हैं। मना करने के इन संकेतों को नजर अंदाज करना और उन्हें जबर्दस्ती खिलाना जारी रखने से बच्चे संतुलित आहार लेने से दूर होते जाते हैं। माता-पिता को बच्चे पर बहुत अधिक दबाव डालने से बचना चाहिए क्योंकि बच्चे घबरा सकते हैं। इसी तरह स्वस्थ भोजन करने के लिए मनाने के लिए माता-पिताओं द्वारा बच्चों को नमकीन दिया जाता है। कभी-कभी यह तरीका बच्चों को स्वस्थ भोजन कराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर हो सकता हैं, तथापि बार-बार ऐसा करने से यह बच्चों के खाने की आदतों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा नियमित रूप से करने से, बच्चा बिना अपना पसंदीदा केक अथवा चाकलेट लिए कभी भी स्वस्थ भोजन नहीं करेगा।

खाते समय मोबाइल, टीवी से रखें दूर

लंबे समय में यह आदत, बच्चे के शारीरिक और दांतों के स्वास्थ्य को प्रतिकूल तरीके से प्रभावित कर सकता है क्योंकि यह आदत बच्चे के मोटापे, दांत में छिद्र और मधुमेह का खतरा उत्पन्न कर सकती है। अस्वास्थ्यकर नमकीन के बजाय स्वस्थ भोजन के रूप में फल देकर इस समस्या से बचा जा सकता है। बच्चें ही नहीं बल्कि व्यस्क भी खाते समय टेलीविजन देखने की आदत से ग्रस्त है। खाने के समय के दौरान भोजन कराने के लिए माता-पिता बच्चों को टेलीवजन देखने अथवा मोबाइल फोन के इस्तेमाल करने की छूट देकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। इसका दुष्प्रभाव यह होता है कि बच्चें सही तरीके से खाने पर ध्यान देने की बजाय टेलीविजन देखने पर अधिक ध्यान देने लगते है।

भोजन में हो पोषक तत्व

बच्चे छोटे होते हैं और उन्हें वयस्कों की तुलना में थोड़ी मात्रा में भोजन की जरूरत होती है। माता-पिता अक्सर इस बात को भूल जाते हैं और बच्चें के समक्ष बहुत अधिक भोजन परोस देते हैं, जिसे देखकर बच्चें बहुत अधिक डर और हतोत्साहित हो जाते है। इससे बचने के लिए माता-पिता थोड़ा और भोजन परोस सकते हैं। भोजन को बच्चों की रुचि के अनुसार परोसना चाहिए और उसमे पोषक तत्वों का भी समावेश करने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों का भोजन रंगबिरंगा हो ताकि उसे देखकर ही बच्चों में भोजन करने की इच्छा जाग्रत हो और स्वाद ऐसा हो जो उन्हें पसंद आए इससे भोजन के प्रति उनकी रुचि विकसित होगी।

Posted By: Sameer Deshpande

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