इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News। शहर के अस्पतालों में गंभीर संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ निजी और सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन की मांग बढ़ती जा रही है। अस्पतालों में आक्सीजन की कमी नहीं हो, इसके लिए सभी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग ने अपने आक्सीजन सिस्टम का आडिट करने को कहा है।

मेडिकल कालेज प्रबंधन भी सभी संबद्ध अस्पतालों में आक्सीजन सिस्टम का आडिट करवा रहा है। इसके माध्यम से यह खोजने का प्रयास किया जा रहा है कि अस्पताल में कही आक्सीजन का रिसाव तो नहीं है। इसके अलावा मेडिकल कालेज प्रबंधन दो तकनीशियनों की नियुक्ति भी कर रहा है, जो अस्पताल में आक्सीजन प्रदाय व्यवस्था पर निगाह रखेंगे। एमजीएम मेडिकल कालेज के डीन डा. संजय दीक्षित के अनुसार एमटीएच अस्पताल के आक्सीजन टैंक को दिन में दो बार रिफिल करते थे, लेकिन अब उसे तीन बार रिफिल किया जाएगा। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के आक्सीजन टैंक को भी चार-चार घंटे में रिफिल किया जाएगा।

वर्तमान में मेडिकल कालेज से संबंधित चारों अस्पतालों में कुल 24 किलोलीटर आक्सीजन क्षमता है। इसमें से अभी 17.771 किलो लीटर ही आक्सीजन की खपत प्रतिदिन हो रही है। मेडिकल कालेज के इन अस्पतालों को अभी तक आइनाक्स कंपनी आक्सीजन उपलब्ध करवाती थी। अब एक अन्य कंपनी से भी अनुबंध किया गया है जिससे आक्सीजन की कमी न हो।

निजी अस्पतालों को आक्सीजन की कमी से हो रही परेशानी

शहर के कई निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण अस्पतालों को आक्सीजन का प्रबंध करने में कठिनाई आ रही है। अरबिंदो अस्पताल के महाप्रबंधक राजीव सिंह के अनुसार आक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वेंटीलेटर, आइसीयू और वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण इसकी मांग बढ़ गई है। वर्तमान में कंपनियों से पर्याप्त मात्रा आक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। हमें ज्यादा सिलिंडर की जरूरत है, लेकिन कंपनी वाले थोड़े-थोड़े करके दे रहे हैं। हम प्रशासन से भी गुजारिश कर रहे हैं कि हमें आक्सीजन ज्यादा मात्रा में उपलब्ध करवाई जाए।

अस्पतालों में गुरुवार चार बजे आक्सीजन की स्थिति

अस्पताल कुल क्षमता उपलब्ध

एमवाय अस्पताल 10 किलोलीटर 2.8 किलोलीटर

न्यू चेस्ट वार्ड 1 किलोलीटर 1.0 किलोलीटर

एमआरटीबी 1 किलोलीटर 0.79 किलोलीटर

एमटीएच 2 किलोलीटर 1.97 किलोलीटर

रात में 20 फीसद आक्सीजन की खपत बढ़ रही

डा. संजय दीक्षित के अनुसार हमने अभी तक आक्सीजन आपूर्ति के सिस्टम का जो आडिट किया है, उसमें यह देखने में आया है कि रात के समय आक्सीजन की खपत में 20 फीसद बढ़ोतरी हो जाती है। इसका कारण यह है कि नर्सिंग स्टाफ अपने आराम के लिए मरीजों को ज्यादा आक्सीजन फ्लो पर रखती है। इस पर भी हम नियंत्रण करने का प्रयास करेंगे। वर्तमान में अस्पतालों में नान ब्रीथिंग मास्क का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मरीज को ज्यादा मात्रा में आक्सीजन मिल सके।

इसके अलावा यह भी देखने में आया है कि सीओपीडी के मरीजों को कितनी भी आक्सीजन दे दो, उनका आक्सीजन सैचुरेशन 92 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ता है। ऐसे में इन मरीजों को ज्यादा आक्सीजन देना कोई उपाय नहीं है। यदि ऐसे मरीजों का टारगेट सेचुरेशन 96 से 97 प्रतिशत तक रखेंगे तो भी काफी मात्रा में आक्सीजन की बचत होगी।

Posted By: Sameer Deshpande

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags