इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खुद को व्हिसल ब्लोअर बताने वाले प्रशांत पांडे ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में अपने व्हिसल ब्लोअर होने की बात साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए। इधर, शासन का कहना है कि इनमें एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं है जिससे साबित हो कि पांडे ने व्यापमं घोटाले की जांच में मदद की। उन्होंने तो मामले में शिकायत तक नहीं की। वे सिर्फ प्रसिद्धि पाने का प्रयास कर रहे हैं।

पांडे का कहना है कि वे व्हिसल ब्लोअर हैं और उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई पेनड्राइव के आधार पर ही व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी। इसके अलावा भी उन्होंने व्हिसल ब्लोअर के रूप में कई राज उजागर किए हैं। उनकी जान को खतरा देखते हुए सरकार ने 2016 से उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई थी, लेकिन 13 जून से इसे हटा लिया गया। उन्होंने दोबारा सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने पांडे से कहा था कि वे अपनी फॉरेंसिक इंजीनियरिंग की डिग्री और पिछले पांच साल में व्हिसल ब्लोअर के रूप में दी गई सेवाओं का ब्योरा कोर्ट में पेश करें।

25 को होगी अंतिम बहस

अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि शुक्रवार को पांडे ने कुछ दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए, लेकिन इनमें एक भी ऐसा नहीं है जिससे साबित हो कि पांडे को सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। जो दस्तावेज उन्होंने प्रस्तुत किए हैं, उनमें व्यापमं घोटाले से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं है। अब कोर्ट मामले में 25 सितंबर को अंतिम बहस सुनेगी। इसके बाद तय होगा कि पांडे की सुरक्षा हटाने का सरकार का निर्णय सही था या दोबारा सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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