इंदौर। शर्ट की कॉलर पर हमेशा तिरंगा बैज और जुबान पर वंदेमातरम। यह हैं 60 वर्षीय भूपेंद्रसिंह डंग की पहचान। बीते 40 वर्षों में उन्हें याद नहीं कि वे कभी बिना तिरंगा बैज लगाए घर से बाहर निकले होंगे। वे कपड़े बाद में बदलते हैं, पहले बैज निकालकर दूसरी शर्ट पर लगाते हैं।

वीर सावरकर नगर निवासी पेशे से फोटोग्राफर भूपेंद्र सिंह बचपन से सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन वजन कम होने के कारण हमेशा मात खा जाते थे। वे कहते हैं कि जितनी बार सेना से उन्हें भर्ती के लिए मना किया जाता, उतनी बार देशप्रेम की भावना बढ़ती जाती थी।

ऐसा करते-करते सेना में भर्ती की उम्र तो निकल गई, लेकिन देशभक्ति की भावना कम नहीं हुई। देश के सम्मान में शर्ट की कॉलर पर तिरंगा लगाना शुरू किया, जिसमें बीच में अशोक चक्र रहता है। वे कहते हैं कि इतने वर्षों में एक दिन भी ऐसा याद नहीं कि वे बिना तिरंगा लगाए घर से बाहर निकल गए हों।

अब तो उनके नाते-रिश्तेदार ही उन्हें तोहफे में बैज देने लगे हैं। जब किसी का फोन आए या फोन करते हैं तो न नमस्ते, न हैलो, सिर्फ उनकी जुबां से 'वंदेमातरम" ही निकलता है। ज्यादातर लोग उन्हें वंदेमातरम के नाम से ही जानते हैं। यहां तक कि लोगों के फोन में इनका नंबर भी वंदेमातरम के नाम से ही सेव रहता है।

वे कहते हैं कि अच्छा लगता है जब लोग उन्हें वंदेमातरम भाईसाहब, वंदेमातरम अंकल या सर कहते हैं, क्योंकि उतनी ही बार उनके मुंह से देश के प्रति सम्मान प्रकट होता है। मैं सभी पर वंदेमातरम बोलने का दबाव तो नहीं डाल सकता, लेकिन इसकी खुशी है कि मेरे माध्यम से लोग अप्रत्यक्ष रूप से देशभक्ति की भावना प्रकट करते हैं।