Indore News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छावनी अनाज मंडी में सैकड़ों किसानों का गेहूं खरीदने के बाद व्यापारियों के पास रुका हुआ भुगतान होने लगा है। जिन फर्मों के पास किसानों का भुगतान रुक गया था, वह अब करने लगी हैं। जय लक्ष्मी फूड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लेकर कुछ और किसानों की शिकायत आई है कि उनका भुगतान नहीं हुआ है। मंडी समिति के अधिकारी उन किसानों का भुगतान भी सोमवार तक कराएंगे। दूसरी तरफ जिन व्यापारिक फर्मों की प्रतिभूति राशि कम जमा थी, उनको भी जांच में लिया गया था। जांच के बाद मंडी समिति ने इन फर्मों की खरीदी से रोक हटा ली है। इन फर्मों में स्वीटी इंटरप्राइजेस, विमल एग्रो और एस कुमार फर्म शामिल है।

जय लक्ष्मी फूड कंपनी में किसानों का लगभग 70 लाख का भुगतान रुका हुआ था। इसमें से अधिकांश भुगतान हो चुका है, लेकिन मंडी समिति के पास अब भी कुछ किसानों की शिकायतें आ रही हैं। शिकायतों के निराकरण और भुगतान के लिए प्रयास जारी हैं। भुगतान में हो रही देरी का एक कारण गेहूं के निर्यात पर लगी रोक और बंदरगाह और उसके रास्ते में गेहूं निर्यातक व्यापारियों का माल रुकना भी बताया जा रहा है। मंडी अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों की शिकायतें हमारे पास आ रही हैं, हम तत्परता से उनका निराकरण करवा रहे हैं।

उधर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों किसान मजदूर सेना और किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने रामस्वरूप मंत्री और बबलू जाधव ने बताया कि किसान संगठनों की सक्रियता के बाद मंडी समिति अधिकारियों ने किसानों का भुगतान कराया। मई के पहले सप्ताह में गेहूं और अन्य फसल खरीदी जाने के बाद व्यापारी लगातार भुगतान में टालमटोल कर रहे थे। किसान संगठनों के हस्तक्षेप के बाद किसानों को करीब 40 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। जिन किसानों का भुगतान हुआ है उनमें गजराज सिंह, सिद्धनाथ, ओंकार, ममता पटेल, अनुकूल ,राजेश, शाहिद, प्रीति, कृष्णा, ज्ञानचंद ,अमीन पटेल, रोहित, किस्मत अली, अमन यादव, सुभाष और संतोष प्रमुख हैं। अभी भी कई किसानों का बकाया है, जिनमें गारी पिपलिया के दिनेश यादव और महेश यादव, काजी पलासिया के फारूख पटेल, खुड़ैल के अनोखी लाल और लीलाधर आदि शामिल है।

Posted By: Sameer Deshpande

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