इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र सरकार ने इंदौर सहित देश के चुनिंदा शहरों को 'बेगर फ्री' यानि भिक्षुक मुक्‍त बनाने की योजना करीब 10 माह पहले बनाई थी, लेकिन पिछले पांच माह से शहर में भिक्षा मांगने वालों के खिलाफ चाइल्ड लाइन व महिला एवं बाल विकास विभाग की मुहिम ही नहीं चल रही है।

कोरोना संक्रमण के बाद कई लोगों का रोजगार छिन जाने से तीन-चार माह में शहर के चौराहों पर भिक्षा मांगने वाले बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ। संक्रमण के डर से अभी इन बच्चों को रेस्क्यू कर सुधारगृह भी नहीं भेजा जा रहा है।

चाइल्ड लाइन की टीम कुछ दिनों से चौराहों पर ऐसे बच्चों व उनके स्वजन के पास जाकर उन्हें सिर्फ समझाइश ही दे पा रही है। एमजी रोड, सरवटे बस स्टैंड व धार्मिक स्थलों के आसपास अब भी कई भिक्षुक बैठ रहे हैं। कई सामाजिक संगठन इनके लिए भोजन, दवाई व कपड़े का इंतजाम करते हैं। शहर में इन लोगों के लिए भिक्षुक गृह भी बनाया गया है, लेकिन वहां भी गिने-चुने भिक्षुक रहते हैं।

निगम ने सर्वे कर भेजी थी रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए निगम को नोडल एजेंसी बनाया था जिसके बाद निगम ने शहर में भिक्षा मांगने वालों का सर्वे कर एक रिपोर्ट बनाकर केंद्र को भेजी थी।

इन शहरों को बेगर फ्री बनाने की है योजना

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नागपुर, पटना, लखनऊ और इंदौर।

इन चौराहों व मार्गों पर अधिक मिलते हैं भिक्षा मांगने वाले

-खजराना

-रणजीत हनुमान

-रेडिसन

-महूनाका

-भंवरकुआं

- छावनी

- पलासिया

-टॉवर

इनका कहना है

हमारी टीम शहर के प्रमुख चौराहों पर भिक्षा मांगने वाले बच्चों व लोगों का सर्वे कर रही है। अभी हम समझाइश देने जाते हैं तो ये लोग हमसे विवाद करते हैं। लॉकडाउन के पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई थी।

राहुल गोठाने, को-ऑर्डिनेटर चाइल्ड लाइन

Posted By: Nai Dunia News Network

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